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डाउनलोड करेंउदयपुर. बेटा या पोता नहीं है तो क्या हुआ, नानी को मुखाग्नि दोहिती दे सकती है। ये घटना बदलते समाज की निशानी है, जहां बेटी या दोहिती इस जिम्मेदारी को निभा रही है। परिवार के सदस्य की मौत पर कंधा कौन देगा या हांडी कौन उठाएगा को नकारते हुए दोहिती ने यह काम कर दिखाया।
शुक्रवार को अपनी नानी शकुंतला देवी कुंवर पत्नी स्व. सज्जनसिंह चुंडावत की मौत पर जहां पल्लवी कुंवर राठौड़ ने अर्थी के आगे चलते हुए हाड़ी उठाई। वहीं, मोक्षधाम में मुखाग्नि भी दी।
बेदला निवासी महेश्वर सिंह कच्छावा ने बताया कि परिवार में कोई लड़का नहीं होने पर यह कार्य बेटी लाड कुंवर की पुत्री पल्लवी ने कर दिखाया कि लड़की होना कोई गुनाह नहीं हैं। बेटी, दोहिती भी वो काम कर सकती है। जिसका अधिकार केवल अब तक समाज ने बेटे, पोते को दिया है।
Photo_Tarachand Gawariya
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