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वल्र्ड माइग्रेटरी बर्ड डे: एक बार में 25 अंडे देने वाली इंडियन रोलर को देखा है...

8 वर्ष पहले
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उदयपुर. पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक सौंदर्य का अभिन्न अंग हैं पक्षी, चाहे वे देशी हो या हजारों किमी की उड़ान भर के लेकसिटी पहुंचने वाले प्रवासी। शनिवार और रविवार को वर्ल्ड माइग्रेटरी बर्ड-डे है। पक्षी प्रेमियों के लिए यह दिन किसी उत्सव से कम नहीं..इस खास मौके पर www.dainikbhaskar.com पर लाया है दुनिया भर से उदयपुर पहुंचने पक्षियों की तस्वीरें...

वर्ल्ड माइग्रेटरी बर्ड-डे पर आयोजित एक कार्यक्रम में बात करते हुए मानद वन्यजीव प्रतिपालक रजा एच तहसीन ने बताया कि गर्मियों में यूरोप, दक्षिण रूस, मंगोलिया, मंचूरिया में घोंसला बनाने वाला कॉमन सैंड पाइपर पक्षी सर्दी बिताने यहां आता है।

कॉमन सैंड पाइपर के सिर का हिस्सा राख जैसे रंग का होता है। आंख के ऊपर एक जोड़ी सफेद पट्टी होती है। ऊपरी हिस्सा ऑलिव ब्राउन रंग का और निचला भाग सफेद होता है। पीठ और पूंछ भूरे रंग की होती है। पूंछ का बाहरी सिरा सफेद होता है और इसके सीने पर भूरे रंग की पट्टी होती है।

तहसीन ने बताया कि यह पक्षी तालाब, नदी नालों और समुद्र किनारे छिछले पानी में घूमकर अपना भोजन तलाशता है। कॉमन सैंड पाइपर का भोजन पानी में रहने वाले छोटे कीट होते हैं।

पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि लेकसिटी में आने वाले पक्षी विंटर के अलावा समर माइग्रेटरी बर्ड भी यहां आते है। इनमें अफ्रीका और पाकिस्तान से आने वाला रोजी फेस्टर, अफ्रीका से आने वाला पाइड कुकु, दक्षिण भारत से आने वाली तरह-तरह की कोयल, पैराडाइस फ्लाई केचर ऐसे पक्षी है जो मई-जून में आते है। डॉ. शर्मा ने कहा कि पक्षी चाहे देशी हो या विदेशी पर्यावरण संतुलन के लिए सभी का संरक्षण जरूरी है।

इन झीलों और तालाबों के पास दिखाई देते है: उदयपुर स्थित फतहसागर, उदयसागर, पीछोला, स्वरूपसागर सहित जयसमंद, मेनार का तालाब, गंधर्व सागर, बागदड़ा का तालाब, वल्लभनगर का सर्जना डेम, भटेवर का तालाब, बडी़ मदार में प्रवासी पक्षियों की अठखेलियां देखते ही बनती है। पक्षियों में रूचि रखने वाले घंटों इन तालाबों के किनारे खड़े रहकर पक्षियों को कैमरे में कैद करने के लिए डटे रहते हैं।

पक्षियों को बचाना होगा: डॉ. शर्मा ने कहा कि पक्षी चाहे देशी हो या विदेशी पर्यावरण संतुलन के लिए सभी का संरक्षण जरूरी है। पक्षी को बचाने के लिए इन बातों का ध्यान रखना होगा।

- पक्षियों के आवास को बर्बाद होने से बचाना होगा।

- झीलों के आसपास के क्षेत्रों के प्रदूषण पर नियंत्रण।

- झीलों के आसपास बिजली के तारों का जाल हटाना होगा।

- पॉलीथिन पर पूरी तरह रोक लगाना होगा।

- झील किनारे क्षेत्रों को आतिशबाजी और शोर से मुक्त रखना होगा।

- चाइनीज डोर पर प्रतिबंध लगाना होगा।

- जहर से मरने वाले चूहों को खुले क्षेत्र में नहीं डालने के बजाए मिट्टी में दबाना होगा।

- लोगों के बीच जागरूकता कार्यक्रम करने की जरूरत।

सभी तस्वीरें..वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर शरद अग्रवाल और अमित गुप्ता के सौजन्य से