पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंउदयपुर. गर्मी पूरे जोरों पर है..और बिजली का हाल खुदा जाने। लेकिन जब शहर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल हर रोज अंधेरे में डुबकी लगाने लगे तो मरीजों का हाल क्या होता होगा? इसकी कल्पना आप कर सकते है।
दरअसल, एमबी अस्पताल में मंगलवार को भी बिजली गुल होने का सिलसिला जारी रहा। इसके चलते रोगियों को खासी परेशानी हुई। जहां मशीनों के बंद पडऩे से जांच सेवाएं ठप रहीं। वहीं, पंखों के बंद पड़ जाने से सांस लेना भी मुश्किल हो गया।
इसके अतिरिक्त बिजली बंद रहने से निशुल्क जांच काउंटर्स पर कंप्यूटर भी बंद हो गए। एक घंटे बाद बहाल हुई सप्लाई से व्यवस्थाएं फिर संभल पाईं। बताया गया कि लाइन में फॉल्ट आने के कारण आए दिन बिजली गुल हो जाती है।
यह आती हैं समस्याएं:
1. सीटी स्कैन, एक्स रे, एमआरआई जांचें करवाने वाले रोगियों को काफी समय इंतजार करना पड़ता है। इससे कतार बढ़ती ही चली जाती है।
2. निशुल्क जांच काउंटरों पर कंप्यूटरों के बंद पड़ जाने से पर्चियां नहीं बन रही है। इससे एकाएक रोगियों की भीड़ बढ़ गई।
3. अस्पताल में इतनी गंदगी के चलते वैसे भी रहना दूभर होता है। उस पर भी बिजली चले जाने से पंखे भी बंद पड़ जाते हैं। गर्मी के मारे रोगियों और परिजनों का हाल बेहाल हो जाता है।
4. अस्पताल के कई विभाग ऐसे हैं, जहां ना कोई खिड़की है ना कोई रोशनदान। ऐसे में बिजली चले जाने से इन गलियारों से निकलना सरदर्द बन जाता है। सभी एक दूसरे से टकराते रहते हैं। कई रोगियों के परिजनों को मोबाइल से रोशनी की सहायता लेनी पड़ती है।
वजह क्या है: आए दिन अस्पताल में कम वोल्टेज के ट्रांसफार्मर और जनरेटर होने से यह समस्या आती है। अस्पताल के हर विभाग में भारी वोल्टेज की मशीनें लगी हुई हैं। एक साथ सभी मशीनों के चलने की वजह से कमजोर ट्रांसफार्मर अधिक लोड नहीं ले पाते। इससे आए दिन पूरे अस्पताल में बिजली सेवा ठप पड़ जाती है।
गौरतलब है कि अधिक क्षमता वाले 6 नए जनरेटर और 4 नए ट्रांसफार्मर स्थापित कर दिए गए है। इन्हें जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।
फोटोः ऋषभ जैन
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.