उदयपुर. सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में सीबीआई द्वारा आरोपी बनाए जाने पर राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
सीबीआई की चार्ज शीट में आरोपी के रूप में नाम आने के बाद कटारिया ने बुधवार को अपने बयान में कहा कि जिस विषय की उन्हें जानकारी ही नहीं। उसी मामले में उन्हें अपराधी बनाया जा रहा है।
कटारिया ने कहा कि केन्द्र सरकार और सीबीआई की सच्चाई जल्दी ही सामने आ जाएगी। कटारिया ने कहा कि सीबीआई इस मामले में आकाश और पाताल ढूंढ लें। उसे कुछ नहीं मिलेगा।
कटारिया ने इस कार्रवाई को चैलेंज करते हुए कहा कि 4 तारीख को उनकी गिरफ्तारी होती है तो विधायक पद से ही इस्तीफा दे देंगे। और जब तक निर्दोष साबित नहीं हो जाते तब तक विधानसभा में कदम नहीं रखेंगे।
इससे पहले बुधवार सुबह दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में बीजेपी नेता अरुण जेटली, अध्यक्ष राजनाथ सिंह और राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने कटारिया का बचाव किया।
बीजेपी नेता अरुण जेटली ने कहा कि यह हमारे नेताओं के खिलाफ राजनीतिक साजिश है और सीबीआई की सप्लीमेंट्री रिपोर्ट तथ्य से परे है। बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि हम अपने नेताओं के साथ खड़े रहेंगे और राजनीतिक व कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
अंडरवर्ल्ड, आईपीएस लॉबी और अवैध वसूली का कॉकटेल है सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस
उन्होंने ने कहा कि इससे पहले भी हमारे नेताओं को बदनाम करने की साजिश की जा चुकी है। चाहे वो अमित शाह का मामला हो या राजेन्द्र राठौड़ का।
राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने कहा कि पूरी पार्टी गुलाब चंद कटारिया के साथ खड़ी है। गौरतलब है कि सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले में सीबीआई ने राजस्थान के पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को आरोपी बनाया है। इसमें कटारिया सहित चार लोगों को आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कटारिया को अमित शाह और मार्बल व्यवसायी विमल पाटनी के बीच की कड़ी बताया है।
कटारिया को आरोपी बनाने की खबर आते ही उनके समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता सकते में आए गए। कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को फोन लगाकर यह जानने का प्रयास किया कि आखिर हकीकत क्या है।
वर्ष 2005 में गुजरात पुलिस ने मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन को मार गिराने का दावा किया था। इस मुठभेड़ को सोहराबुद्दीन के परिवार जनों ने फर्जी मुठभेड़ बताया। इसके बाद सोहराबुद्दीन का साथी तुलसी प्रजापति भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
गौरतलब है कि सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में कुछ समय पहले ही सीबीआई ने गुलाबचंद कटारिया को गांधी नगर बुलाकर उनसे लंबी पूछताछ की थी। इस मामले में उदयपुर के पूर्व एसपी दिनेश एमएन सहित चार पुलिस अफसर जेल में है।
फैक्ट फाइलः गुजरात, उदयपुर, मार्बल व्यवसायी, सोहराबुद्दीन और धन उगाही
: उदयपुर में हिस्ट्रीशीटर हमीदलाल उर्फ लालो की हत्या के बाद रची गई सोहराबुद्दीन और तुलसी के एनकाउंटर की साजिश।
: 31 मई 2004 को सुबह के वक्त हिस्ट्रीशीटर हमीदलाल उर्फ लालो की हत्या कर दी गई। इस मामले में सोहराबुद्दीन, तुलसी प्रजापति और उदयपुर निवासी मोहम्मद आजम मुख्य आरोपी थी। हत्या की वजह अवैध वसूली को लेकर विवाद रहा।
: गुजरात में वांटेड होने के कारण गुजरात पुलिस ने सोहराबुद्दीन को आंध्रप्रदेश से गिरफ्तार किया। इसके बाद गुजरात में 2005 में सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर किया गया। उसकी पत्नी कौसर बी गायब हो गई, जिसका कोई पता नहीं लगा।
: दिसंबर 2006 में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का चश्मदीद गवाह उसका साथी तुलसी प्रजापति को उदयपुर जेल से गुजरात ले जाते वक्त एनकाउंटर किया गया।
: वर्ष 2007 में गुजरात विधानसभा में यह मामला उठा। पहले गुजरात पुलिस ने इस मामले की जांच की। इसके बाद मामला सीबीआई के पास चला गया।
: सीबीआई की जांच के बाद उदयपुर के तत्कालीन एसपी दिनेश एमएन, सीआई अब्दुल रहमान, एसआई श्यामसिंह, हिमांशु राव, सिपाही करतार सिंह, युद्धवीरसिंह, करणवीर सिंह की गिरफ्तारी हुई।
: सीबीआई ने सोहराबुद्दीन की जांच के बाद तुलसी प्रजापति एनकाउंटर की जांच ले ली। इन दोनों मामलों में सीबीआई ने उदयपुर और राजसमंद में मार्बल व्यवसायियों, अपराधियों व अन्य लोगों से पूछताछ की। करीब एक साल तक सीबीआई उदयपुर में इन लोगों से पूछताछ करती रही।
हमीदलाल की हत्या क्यों कीः गुजरात में सोहराबुद्दीन कथित रूप से व्यापारियों से अवैध वसूली करता था। गुजरात में उसका आतंक बढ़ गया। पुलिस से बचने के लिए वह अक्सर उदयपुर आया करता था।
इस दौरान उसकी स्थानीय अपराधी मोहम्मद आजम से मुलाकात हो गई। इस पर सोहराबुद्दीन और आजम ने मिलकर उदयपुर में मार्बल व्यवसायियों से उगाही की रणनीति तैयार की। उस वक्त उदयपुर में हमीदलाल का दबदबा था।
एक मार्बल व्यवसायी से उगाही के दौरान हमीदलाल ने आजम को पकड़वाने में भूमिका निभाई थी। इस पर आजम ने सोहराबुद्दीन के साथ मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची थी।
इसके बाद ही सोहराबुद्दीन ने मार्बल व्यवसायियों से फिरौती मांगना शुरू किया था। हमीदलाला मर्डर केस की सुनवाई के दौरान ही सोहराबुद्दीन, तुलसी और एक अन्य मुदस्सिर की मौत हो गई। आरोप साबित नहीं होने पर आजम सहित अन्य आरोपी बरी हो गए।