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डीसी केवल कर रहे हैं नौकरी, अधिकारियों के पास नए सोच की कमी : हेमंत सोरेन

8 वर्ष पहले
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एक दैनिक अखबार के कार्यक्रम में सीएम ने प्रकट की विकास नहीं होने की बेबसी
अधिकारियों व राजनीतिक व्यवस्था पर किया प्रहार, अगर हम नहीं परिवर्तित नहीं हुए तो इतिहास हमें परिवर्तित कर देगा
सीएस को दिया निर्देश, फिल्ड में नहीं जाने वाले अधिकारियों की सूची बनाएं, करेंगे बर्खास्त
नक्सल बन नहीं रहे हैं, बनाए जा रहे हैं, कार्यपद्धति से क्षुब्ध होकर लोग उठा रहे हैं हथियार
भास्कर संवाददाता, रांची
फोटो वसीम की
यह वक्त यह सुनिश्चित करने की है हम अपने दायित्वों को समझें। केवल हम एक दूसरे पर दोषारोपण करके अपने दायित्वों से मुकर जाते हैं। राजनीतिक इच्छा शक्ति व राजनीतिक अस्थिरता तो विकास में बाधक है ही। मगर इसके लिए राज्य के पदाधिकारियों की इच्छा शक्ति में कमी होना भी एक अहम कारण है। आज भी हमारे पदाधिकारी पुराने ढऱे पर चल रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा पदाधिकारी हो, जिसके पास नई सोच है। कोई भी पदाधिकारी नया आइडिया लेकर नहीं आता है। डीसी केवल अपनी नौकरी कर रहे हैं, जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं है। अफसोस की बात है कि सरकार के पास संसाधन व पैसे की कमी नहीं है, कमी है तो नई सोच व क्रिएटिव विचार की। पदाधिकारी फिल्ड में नहीं जाते हैं कार्यालय व एससी कमरा-होटल में बैठकर योजना बनाते हैं और काम करते हैं। यहां पर मुख्य सचिव मौजूद हैं, वे ऐसे पदाधिकारियों को चिंह्नित करें, उन्हें बर्खास्त करने में जरा भी देर वे नहीं करेंगे। उक्त बातें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दैनिक जागरण के \"और कितना वक्त चाहिए झारखंड को\" से जुड़ी पुस्तक लोकापर्ण के दौरान कही। उन्होंने कहा कि झारखंड की भौगोलिक बनावट पूरी तरह अलग है। पांचों प्रमंडल के रूपरेखा, रहन-सहन, खान-पान एक दूसरे से भिन्न है। कहां के लिए क्या योजना बनाना है, यह वहां की परिस्थिति को देख कर करना होगा। उन्होंने कहा कि नक्सल बन नहीं रहे हैं, बनाए जा रहे हैं। लोग कार्यपद्धति से नाराज होकर बंदूक उठा रहे हैं। आज हमारे यहां हजारों बेगुनाह लोग ऐसे हैं, जो कोई अपराध नहीं करते हुए भी जेल में बंद हैं। आखिरकार वे लोग कैसे आपके सिस्टम में भरोसा कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड परिवर्तन की दौर से गुजर रहा है, अगर हम परिवर्तित नहीं हुए तो, इतिहास हमें परिवर्तित कर देगा। कार्यक्रम में मुख्य सचिव आर एस शर्मा, सीएम के प्रधान सचिव सुखदेव सिंह, वरिष्ठ पत्रकार बलबीर दत्त, कमलेश रघुवंशी, रांची विधायक सी पी सिंह, अशोक भगत, उदय शंकर ओझा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
जब एक सीएम इतने बेबस होंगे तो कैसे चलेगा : बाबूलाल मरांडी
झारखंड के पूर्व सीएम व झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब एक सीएम इतनी बेबसी व लाचार प्रकट करेंगे तो कैसे चलेगा। ऐसा नहीं है कि 13 वर्षों में विकास नहीं हुआ। हां इतना जरूर है कि जितना होना चाहिए था, नहीं हुआ। विकास रातो-रात नहीं होगा। यह निरंतर सतत प्रकिया है। कम से कम हम न्यूनतम विकास तो कर ही सकते हैं। झारखंड में सबसे पहले भयमुक्त वातावरण बनाने की जरूरत है। विकास का एक मैकेनिज्म डेवलप करना होगा। इसके लिए जरूरी है कि सत्ता में बैठे लोग राजनीतिक इच्छा शक्ति से काम करें और करवाएं।
छह माह में विकास की लकीर तो खींच ही दी है : राजेंद्र सिंह
राज्य के उर्जा व वित्त मंत्री राजेंद्र सिंह ने कहा कि वे बोलने में नहीं बल्कि काम करने में विश्वास रखते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में हमारी सरकार ने छह माह में कम से कम विकास की लकीर तो खींच दी है। विकास के लिए जरूरी है कि केवल विरोध की राजनीति न हो।
झारखंड का विकास आदिवासी मॉडल पर हो : सुबोधकांत सहाय
झारखंड में आदिवासियों के प्रति यह विचारधारा बनते जा रही है कि वे विकास विरोधी हैं। मगर ऐसा नहीं है। दरअसल झारखंड में जमीन व विस्थापन की समस्या गंभीर है, अगर आदिवासियों व ग्रामीणों को विश्वास में लेकर काम हो तो बेहतर रिजल्ट होगा। झारखंड का विकास आदिवासी मॉडल पर हो, कहीं विरोध नहीं होगा। विकास भी तेजी से होंगे।