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डाउनलोड करेंरांची. भ्रष्टाचार के खिलाफ केदार नाथ पिछले पांच वर्ष से संघर्ष कर रहा है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सांसद समेत राज्य के अधिकारियों से नरेश को अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। समुचित कार्रवाई की मांग को लेकर वह राजभवन के समक्ष धरने पर बैठ गया। यूथ पावर ऑफ इंडिया के बैनर तले आमरण अनशन पर बैठे नरेश का आधा दर्जन से अधिक संगठनों ने समर्थन किया है। इसमें नागरिक मंच, अधिवक्ता मंच, इंडियन एसोसिएशन ऑफ लायर्स, इंसाफ झारखंड, झारखंड राज्य महिला समाज शामिल हैं।
यह है मामला
नरेश ने बताया कि उसका पारा शिक्षक के पद पर साल 2008 में चयन हुआ था। बोकारो के गोमिया में। उसने कहा, 'रिश्वत नहीं देने के कारण मेरा नाम रजिस्टर से छेड़छाड़ कर हटा दिया गया। राज्यपाल के आदेश पर कार्यपालक दंडाधिकारी ने मामले की जांच की। जांच रिपोर्ट में नियुक्ति में गड़बड़ी की बात समाने आई है। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई।'
सीएम ने मामले में किया हस्तक्षेप
मुख्यमंत्री सचिवालय से धरने पर बैठे नरेश को सूचना दी गई कि बोकारो डीसी को समुचित कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। इसके बाद बोकारो डीसी ने शिक्षा पदाधिकारियों के साथ शुक्रवार को मीटिंग की। हालांकि कार्रवाई क्या हुई, इस संबंध में सूचना नहीं दी गई है।
तीन मांग पूरी करे सरकार
-फरवरी 2008 से नियुक्ति हो।
-एरियर का भुगतान तत्काल हो।
-दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो।
फोटो : वर्क में नरेश के नाम से है
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