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डाउनलोड करेंरांची. सरकार ने सिर्फ घोषणा कर रखी है कि आदिम जनजाति के वैसे युवा जिन्होंने स्नातक कर रखा है उनकी सीधी नियुक्ति की जाएगी। कई ऐसे आदिम जनजाति के युवा है जो स्नातक और स्नातकोत्तर है लेकिन उनके पास नौकरी नहीं है। उक्त बातें शुक्रवार को मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में आदिम जनजाति की छात्राओं ने कही।
राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर रांची विश्वविद्यालय के मानव विज्ञान विभाग और विकास भारती बिशुनपुर की ओर से पहाड़ों की बेटियों को सम्मान व परिचर्चा का आयोजन किया गया था।
लातेहार के बिरजिया समुदाय की आदिम जनजाति बसंती तेलरा कहा कि उन्होंने रेजा का काम कर बीए किया। फिर स्कॉलरशिप की राशि से एमए। कॉलेज के हॉस्टल में पैसे के लिए झाड़ू भी लगाया। लेकिन उन्हें आज तक सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। असुर जनजाति की सन्यो कुमारी ने कहा कि उन्होंने काफी मुश्किल हालात में बीए किया है। वे आगे भी पढऩा चाहती है। लेकिन उनके पास संसाधन नहीं है।
कार्यक्रम में विकास भारती के सचिव अशोक भगत, डॉ करमा उरांव, अविनाश चंद्र मिश्रा, गणेश रेड्डी, मानव विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ कंचन राय, आदिवासी कल्याण आयुक्त राजेश शर्मा, आईएमए के डॉ अजय सिंह, जेसीपीसीआर की सदस्य रंजना चौधरी सहित काफी संख्या में स्टूडेंट्स उपस्थित थे। मौके पर ज्ञान निकेतन की बच्चियों ने शिक्षा पर आधारित नाटक 'हम पढ़ेंगे आगे बढ़ेंगेÓ का मंचन भी किया।
सिर्फ सरकार समस्या का समाधान नहीं कर सकती : आदिवासी कल्याण आयुक्त
आदिवासी कल्याण आयुक्त राजेश शर्मा ने कहा कि सिर्फ सरकारी स्तर पर आदिम जनजातियों का विकास नहीं हो सकता। इसके लिए उन्हें भी सही फोरम पर अपनी आवाज उठानी होगी। आदिवासी जनजाति के लिए जो बजट मिलता है उसमें 60 फीसदी राशि सिर्फ छात्रवृति में ही खर्च हो जाती है। विकास के लिए बहुत कम बजट मिलता है।
रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एलएन भगत ने कहा कि शिक्षा से ही आदिम जनजातियों का विकास हो सकता है। इसके लिए उन्हें क्वालिटी एजुकेशन देने का प्रयास करना चाहिए। करमा उरांव ने कहा कि आजादी के 65 साल के बाद भी आदिम जनजातियों की न तो आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और न ही शैक्षणिक स्थिति में।
जेसीपीसीआर की सदस्य रंजना चौधरी ने कहा कि 1961 में झारखंड में 2.5 लाख आदिम जनजाति थे आज 2.32 लाख आदिम जनजाति रह गए है।
इन्हें किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में आदिम जनजाति की सात छात्राओं को सम्मानित किया गया। इसमें कोरबा जनजाति की सुशीला कुमारी, माल पहाडिय़ा जनजाति की पिंकी पहाडिन, पहाडिय़ा जनजाति की अरपिता सौर, अंकिता पहाड़ी, असुर जनजाति की सन्यो असुर, बिरजिया जनजाति की बसंती तेरला, पहडिय़ा जनजाति की अनिमा कुमारी, बिरजिया जनजाति की पूनम तेरला शामिल हैं।
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