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डाउनलोड करेंरांची. सलमान खान पर आरोप लगते आए हैं कि वे सिर्फ मसाला फिल्में ही करते हैं। लेकिन इस बार अपने क्रिटिक्स को जवाब देने के लिए इश्यू बेस्ड (मुद्दों पर आधारित) 'जय हो' लेकर आए हैं, जिसमें आम आदमी की परेशानियों (आम आदमी पार्टी से संबंध नहीं) को दर्शाया गया है।
'कोई थैंक्यू कहे, तो उससे कहो थैंक्यू न कहे, बल्कि तीन आदमी की मदद करे और उन तीनों से कहो वह भी तीन आदमी की मदद करे' जैसा कॉन्सेप्ट लोगों को फिल्म से जोड़ता है। वैसे सलमान के फैन्स के लिए भी 'आम आदमी सोता हुआ शेर है, उंगली मत कर, जाग गया तो चीर-फाड़ देगा' जैसे डायलॉग और सलमान का शानदार एक्शन भी है। एक बार में 10 नहीं बल्कि दर्जनों लोगों को धूल चटाते दिखते हैं। सलमान के फिल्मी कैरेक्टर में अब लोग इतने अभ्यस्त हो गए हैं कि ये चीजें अविश्वसनीय नहीं लगतीं। सलमान इसमें मार-धाड़ के साथ नोंचते और काटते भी दिखे हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी एपिसोडिक कहानी है। टीवी धारावाहिक की तरह ढाई घंटे की फिल्म कई हिस्सों में बंटी नजर आती हैं। जय (सलमान) आम आदमी है, जो अपनी मां (नादिरा), बहन (तब्बू) के साथ रहता है। राज्य का गृह मंत्री (डैनी) के अत्याचार को खत्म करने के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं करता।
चुलबुलनुमा छवि से अलग सलमान खान की एक्टिंग काफी अच्छी है। तब्बू के लिए इससे अच्छा कमबैक और नहीं हो सकता था। डेजी शाह साधारण हैं। डैनी जमते हैं। मां की भूमिका में नादिरा बब्बर प्रभावित करती हैं। छोटी भूमिका में जेनेलिया डिसूजा कमाल करती दिखी हैं। सपोर्टिंग भूमिका में भूले-बिसरे पुराने ऐक्टरों को देखना सुखद लगता है।
निर्माता-निर्देशक : सोहैल खान
संगीत : साजिद-वाजिद
कलाकार : सलमान खान, तब्बू, डेजी शाह, डैनी, नादिरा आदि। प्वाइंट : 3.5/5
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