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डाउनलोड करेंरांची/जमशेदपुर. 22 जनवरी की शाम करीब सात बजे सुधीर महतो शादी समारोह में भाग लेने अपने आवास से निकले थे। लेकिन, लगभग 63 घंटे बाद उनका पार्थिव शरीर उलियान स्थित आवास पहुंचा। शव देखते ही बड़ी बिटिया सुजया रोते हुए अपनी बुआ शांति महतो से लिपट गई। वह बार-बार एक ही बात कहती- ‘अब मैं कैसे रहूंगी। बाबा, आप कहां चले गए’।
शुक्रवार को सुबह 9.55 बजे पुराने घर के आंगन में पति का पार्थिव शरीर पहुंचते ही सबिता महतो उससे लिपट कर जोर-जोर से रोने लगी। यह देख आंगन में मौजूद सभी लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। आभा महतो व सुमन महतो ने सबिता को संभालने की कोशिश की। मगर, सुमन महतो भी खुद पर काबू न रख सकी और फफक पड़ी। आस्तिक महतो, चंपई सोरेन व शैलेंद्र महतो परिवार के लोगों को ढांढ़स पहुंचाने में लगे थे।
जब सबिता ने कहा-‘अब परिवार को कौन देखेगा’, तो उनकी आंखों से भी आंसू की धार फूट पड़ी। बालकनी में खड़े आस-पड़ोस के लोगों का भी यही हाल था।
आगे पढ़िए, अंतिम संस्कार की पूरी रिपोर्ट और साथ में देखिए तस्वीरें...
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