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जयपुर में नारकीय जीवन जी रहे बच्चों को मिली नई जिंदगी

7 वर्ष पहले
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रांची/मेदिनीनगर। पलामू जिले के मनातू थाना के बंसी गांव के पांच बच्चों को श्रम विभाग द्वारा जयपुर से मुक्त कराकर लाया गया है। सोमवार को बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। मुक्त बच्चे जयपुर के चूड़ी फैक्ट्री में नारकीय जीवन जीने को विवश थे। जहां उनका बचपन कांच की चूडिय़ों के बीच कैद होकर रह गया था। छापामारी दल यह देखकर दंग रह गया कि बच्चों को बोरे में बंद कर छिपाने की कोशिश की गई थी। आजादी के बाद बच्चों के चेहरे पर खुशी स्पष्ट देखी जा सकती थी।

ऐसे मुक्त हुए बच्चे

जिले के मनातू थाना क्षेत्र के बंशी गांव में गरीबी का दंश झेल रहे पांच बच्चे विगत डेढ़ वर्षों से जयपुर स्थित एक चूड़ी फैक्ट्री में बंधुआ मजदूर के रूप में कार्य कर रहे थे। काफी प्रयास के बाद उन्हें मुक्त कराया जा सका। पीडि़त बच्चों के रोंगटे खड़े कर देनेवाली आपबीती सुनकर सरकारी पदाधिकारी भी हतप्रभ हैं। गौरतलब हो कि एक बच्चे की पिता के शिकायत पर जयपुर पुलिस व प्रशासन हरकत में आया था। जयपुर की पुलिस ने राजस्थान बाल संरक्षण अभियान के तहत कारवाई करते हुए जयपुर के सी 738 बिलाल मस्जिद, भट्टा बस्ती (शास्त्री नगर) स्थित अफजल खान के चूड़ी फैक्टरी पर छापामारी कर दस बच्चों को मुक्त कराया। बच्चों को मुक्त कराने के बाद पंाच बच्चों को जयपुर स्थित किशोर गृह तथा पांच बच्चों को तावर नामक संस्थान में रखा गया। इसके उपरांत राजस्थान बाल संरक्षण अभियान के सचिव ने इसकी सूचना झारखंड के संयुक्त श्रमायुक्त अजीत कुमार पन्ना को दी। अजीत कुमार पन्ना ने तीन सदस्यी टीम का गठन कर मुक्त कराये गये बच्चों को जयपुर से लाने तथा परिजनों को सौंपने का जिम्मा दिया। टीम में गढ़वा जिला के नगरऊंटारी के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुनील कुमार, बालूमाथ के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी रविन्द्रनाथ तथा लातेहार के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बसंत कुमार महतो शामिल थे।

कहते हैं बच्चे

मुक्त कराये गये बंशी गांव के मो रईश खां के 12 वर्षीय पुत्र मो जमील खान ने बताया कि करीब डेढ वर्ष पूर्व सरईडीह गांव के भोला खान के साथ वह जयपुर गया था। भोला खान ने हमारे पिता को काम के बदले अच्छे पैसे देने तथा आराम से काम करने की बात कही थी। उसने अपनी मर्जी पर घर लौट जाने की बात भी कही थी। परन्तु जब वह जयपुर गया तो उसे चुड़ी बनाने के काम पर लगा दिया गया। काम के बदले न तो उसे पैसे दिये जा रहे थे और न ही उसे घर जाने दिया जा रहा था। कुछ दिन पूर्व जब जमील के पिता उसे लेने जयपुर गये तो उनसे बंधुआ मजदूरी करवाने वालों ने साथ मारपीट की। जिसके बाद जमील के पिता मो रईश खान ने स्थानीय थाना में शिकायत दर्ज करायी। जिसके बाद कारवाई करते हुए राजस्थान बाल संरक्षण अभियान के तहत बच्चों को मुक्त कराया गया। इसी तरह बंशी गांव के ही पंकज कुमार भुईयां (14 वर्ष), गोविंदा भुईयां (8 वर्ष), अरविंद कुमार भुईयां (12 वर्ष) तथा कंचन कुमार गुप्ता (३५ वर्ष) ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उनसे 15 से 18 घंटे तक काम कराया जाता था। न तो ठीक से खाना दिया जाता था और न ही ठीक से सोने दिया जाता है।

चूड़ी बनाने में दक्ष हैं मुक्त कराये गये बच्चे

जयपुर से मुक्त कराये गये बच्चे चुड़ी बनाने में पूरी तरह से दक्ष हैं। उन्हें चुड़ी बनाने का रॉ मेटेरियल उपलब्ध कराया जाय तो वे मिनटों में चुड़ी बना देते हैं। बच्चों ने बताया कि जयपुर जाने से पूर्व वे अपने गांव में ही सरकारी विद्यालय में पढ़ते थे। परन्तु जयपुर जाने के कारण उनकी पढ़ाई छूट गई। इन बच्चों ने एक बार फिर से अपनी पढ़ाई शुरू करने की इच्छा जताई है।

बाल संरक्षण आयोग पुनर्वास व पढ़ाई की करेगा व्यवस्था
राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य संजय कुमार मिश्र ने बताया कि मुक्त कराये गये बच्चों को पुनर्वास एवं पढ़ाई की व्यवस्था आयोग के द्वारा किया जायेगा। इसके लिए संबंधित विभाग को निर्देश दिये जायेंगे। उन्होंने बताया कि फिलहाल प्रभावित सभी बच्चों को 25 25 हजार रूपये की सरकारी सहायता उपलब्ध करायी जायेगी। वे इस संबंध में राजस्थान बाल संरक्षण आयोग से भी पत्राचार करेंगे।
कहते हैं टीम के सदस्य
बच्चों को जयपुर से लाने गये तीन सदस्यीय टीम के सदस्य सुनील कुमार ने बताया कि बच्चों के साथ निर्दयता के पेश आया जाता था। छापामारी के वक्त बच्चों को बोरे में छुपाकर रखा गया था। उन्होंने बताया कि मुक्त कराये गये दस बच्चों में से पांच बच्चे गिरीडीह जिले के थे। जिन्हें जिले के संबंधित पदाधिकारियों को सौंप दिया गया है।
फोटो कैप्शन : टीम के सदस्य के साथ मुक्त कराये गये बच्चे।

फोटो : राणा अरुण सिंह।