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डाउनलोड करेंरांची/पाकुड़. बहुचर्चित सिस्टर वालसा हत्याकांड समेत कई गंभीर मामले के आरोपी नक्सली हीरामन मरांडी को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर पाकुड़ जिले का अमड़ापाड़ा इलाके से गिरफ्तार कर लिया। हीरामन पर पैनेम कोल माइंस में आगजनी कर एक गार्ड की हत्या मामले में भी संलिप्तता का आरोप है।
थाना से प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार को एलआरपी के लिए निकली पुलिस को नक्सली हीरामन मराण्डी के छुपे होने की सूचना मिली। इसके आधार पर पुलिस उसे गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है। हीरामन ने पुलिस के समक्ष उक्त दोनों कांडों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है।
पूछताछ में मिले कई अहम सुराग
15 नवम्बर 2011 को अमड़ापाड़ा के पुचवाड़ा गांव में हुए चर्चित सिस्टर वालसा हत्याकांड में शामिल नक्सली हीरामन मराण्डी ने पुलिस के समक्ष कई अहम राज उगले हैं। पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अपने बयान में बताया है कि सिस्टर वालसा के हत्या की रात पचुवाड़ा गांव के पाइसिल मुर्मू, प्रेम तुरी, ताला मुर्मू, राकेश मिर्धा, साइमन टूडू, चंद्रमोहन मराण्डी, करण मुर्मू, सुरेश मुर्मू साहेबराम मडैया, डांगापाड़ा गांव के मुंशी टूडू, खांड़ोकांटा गांव के सोनालाल हांसदा, बारगो गांव के जीतन, चटवारी, रमेश, सुनील, आलूबेड़ा गांव के बबलू मुर्मू, राजू मुर्मू, जीतन मुर्मू, एडविन मुर्मू, नाजिर सोरेन व दो रसूखदार अप्रथमिकी अभियुक्त पचुवाड़ा गांव में जमा हो गए थे। हीरामन मराण्डी ने बताया कि सिस्टर वालसा की हत्या को नक्सली स्वरूप देने के लिए हत्या के बाद हाथ से लिखे गए पोस्टर भी फेंके गए थे।
बड़ा ठेकेदार बनाने का दिया था लालच
31 बीघा धानी जमीन के इकलौते मालिक हीरामन मराण्डी को अति लालच ने नक्सली बनने पर विवश कर दिया। उसने बताया कि वह एक मामूली मुंशी का काम करता था परन्तु, कुछ लोगों ने उसे बड़ा ठेकेदार बनाने का लालच दे कर सिस्टर का हत्या करने के लिए उकसाया था। जबकि जनवरी 2012 में कठालडही स्थित पैनेम कोल माइंस में हुए नक्सली हमले में उसे 10 हजार रूपये देने का लालच दिया गया था। हीरामन ने बताया कि न ही उसे ठेकेदारी मिली और न ही 10 हजार रुपए।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छा गया गया था वालसा हत्याकांड
15 नवम्बर 2011 को हुए सिस्टर वालसा हत्याकांड के बाद एक ओर जहां इलाके में दहशत का माहौल था वहीं यह खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छायी रही थी।सिस्टर की हत्या ने मीडिया जगत में कई सवालों को जन्म दिया था जो आज भी अनसुलझे हैं। गरीबों की मसीहा के रूप में विख्यात सिस्टर वालसा हत्याकांड में शामिल लगभग आधा दर्जन आरोपी अभी भी सलाखों के पीछे हैं जबकि कई आरोपी न्यायालय से अग्रिम जमानत पर रिहा हैं।
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