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कॉलेज छोड़ा, पर साथ ले गए बेंच- डेस्क

7 वर्ष पहले
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फोटो : वर्क में रांची कॉलेज, 1, 2, (तीन फोटो) के नाम से है।
विवाद : रांची कॉलेज प्रबंधन का विरोध जताने के बाद टूटने से बचा बॉटनी लैब।
रांची। रांची यूनिवर्सिटी के पीजी साइंस डिपार्टमेंट्स का अपना भवन नहीं था। इसलिए इसलिए इन विषयों की पढ़ाई रांची कॉलेज में होती है। बेसिक साइंस भवन बनने के बाद पीजी डिपार्टमेंट्स शिफ्ट होने लगे। इसमें पीजी फिजिक्स और बॉटनी डिपार्टमेंट विवाद में आ गया। एक सप्ताह से पीजी बॉटनी विभाग को नए भवन में शिफ्ट करने की प्रक्रिया चल रहा है। लेकिन बुधवार को कॉलेज प्रबंधन और विभाग आमने-सामने आ गए। विवाद के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। तब जाकर लैब टूटने से बचा। इस मामले के विरोध में कॉलेज के सभी शिक्षकों ने प्राचार्य मिलकर विरोध जताया। कहा कि कॉलेज को उजाडऩे को किसी को अधिकार नहीं है।

विवि अधिकारी पहुंचे कॉलेज
फर्नीचर उखाड़कर ले जाने की सूचना मिलने के बाद विवि अधिकारी रांची कॉलेज पहुंचे। प्राचार्य ने बताया कि सीसीडीसी डॉ. पीके सिंह ने कहा कि क्या प्रमाण है कि यह फर्नीचर आपका है। प्रमाण (कागजात) दिखा सकते हैं। इस बात का प्राचार्य ने कड़ा विरोध किया। रजिस्ट्रार डॉ. एके चौधरी से प्राचार्य ने आपत्ति जताई।
वीसी डॉ. भगत से मिले प्राचार्य
रांची विवि मुख्यालय में वीसी डॉ. एलएन भगत से प्राचार्य डॉ. यूसी मेहता 3.30 बजे मिलकर विरोध जताया। वीसी डॉ. भगत ने प्राचार्य का आश्वासन दिया कि लैब को टूटने नहीं दिया जाएगा। इस संबंध में संबंधित विभाग के एचओडी को निर्देश दे दिया गया है।
फिजिक्स विभाग हो चुका बर्बाद
कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि फिजिक्स डिपार्टमेंट ने एक साल पहले खाली करते समय विभाग को बर्बाद कर दिया। लैब को तहस-नहस कर दिया गया। वायरिंग उखाड़ा, पंखा समेत अन्य फर्नीचर अपने साथ लेते गए। इतना ही नाली का स्लैब (लोहे) भी उठा ले गए।
कॉलेज के लिए दुखद है
रांची कॉलेज के भवन का सालों तक पीजी साइंस विभागों की पढ़ाई होती रही। शिफ्ट होते समय फर्नीचर ले जाना और लैब को नुकसान पहुंचाना दुखद है। पीजी के स्टूडेंट्स वैकल्पिक व्यवस्था होने तक लैब तक उपयोग का कर सकते थे। डॉ. यूसी मेहता, प्राचार्य रांची कॉलेज।