रांची। टाटा मेडिकल सेंटर (टीएमसी) कोलकाता की कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ नम्रता अग्रवाल ने कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर लाइलाज समस्या नहीं है। इसका पता शुरुआती दौर में ही लग जाए, तो इस समस्या से उबर पाना आसान होता है। ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जानकारी और इसके प्रति जागरूकता का होना बहुत जरूरी है। महिलाएं स्वयं निरीक्षण करती रहें और हर दिन मात्र दस मिनट निकालकर आप ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से खुद को बचा सकती हैं। डॉ नम्रता शनिवार को गुरु दर्शन योग केंद्र कांके में योग मित्र मंडल की ओर से आयोजित व्याख्यान में बोल रही थीं।
क्या है लक्षण
डॉ नम्रता ने कहा कि महिलाएं अपने वक्ष या स्तनों में गांठ, जिसमें दर्द हो। स्तनों का जरूरत से ज्यादा कठोर होना। बेवजह दर्द होना। तरल पदार्थ का स्राव होना। आकार में परिवर्तन या जलन होना। ऐसे किसी भी प्रकार के बदलाव पर डॉक्टर की मदद लें। हर माह मासिक धर्म के एक सप्ताह के बाद अपने ब्रेस्ट की स्वयं जांच करें। घर में ब्रेस्ट परीक्षण किया जा सकता है। 20 से 40 साल की उम्र के दौरान हर साल डॉक्टर के पास जाकर एक बार जांच अवश्य कराएं, ताकि ब्रेस्ट कैंसर का पता जल्द चल सके। 40 साल की उम्र के बाद तीन साल में एक बार मेमोग्राफी अवश्य कराएं।
हर साल एक लाख नए केस आते हैं सामने
हमारे देश में हर साल ब्रेस्ट कैंसर के एक लाख से सवा लाख तक नए केस सामने आ रहे हैं और अनुमान है कि 2015 तक यह आंकड़े बढ़ कर दोगुने हो जाएंगे। शहरी हो या गांव में रहने वाली, औसतन हर 22वीं महिला को कभी न कभी स्तन कैंसर होने की आशंका रहती है। बदलते समय में शहरी भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर आम बीमारी हो गई है।
शर्म हावी न हो समस्या पर
डॉ नम्रता ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर एक गंभीर समस्या है, इसलिए सिर्फ शर्म की वजह से न तो इसको नजरअंदाज करें और न ही इस समस्या के बारे में चुप्पी साधे। इस विषय पर अपने आसपास के लोगों से चर्चा करें और इसके बारे में ज्यादा जानकारी लेने का प्रयास करें। जानकारी से इस रोग से बचाव संभव है। कार्यक्रम के आयोजन में योग मित्र मंडल के आरके कटारिया, सचिव केके मिश्रा, निखिल जैन ने योगदान दिया।