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हिंदी दिल को छू लेने वाली भाषा : हेमंत सोरेन

7 वर्ष पहले
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फोटो - दीप प्रज्वलित कर समारोह का उद्घाटन करते सीएम हेमंत सोरेन।
रांची। हिंदी ऐसी भाषा है जो हरेक के दिल को छू लेती है। हमारे देश में सभी धर्म संप्रदाय के लोग रहते है। कई भाषाएं बोली जाती है। लेकिन हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो सभी के समझ में आसानी से आ जाती है। उक्त बातें रविवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही। सोरेन श्री कृष्ण लोक प्रशासन संस्थान रांची में हिंदी दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह का आयोजन कार्मिक, प्रशासनिक, सुधार एवं राजभाषा विभाग और श्री कृष्ण लोक प्रशासन संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में किया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हिंदी भाषा पर प्रहार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब को मिलकर हिंदी के विकास के लिए कार्य करना होगा। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि रविवार की सुबह एक अखबार में वे हिंदी पर आलेख पढ़ रहे थे, जिस पर हिंदी को लेकर व्यंग्य किया गया था कि ये कैसे बिगड़ती जा रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमें हिंदी के लिए कुछ ऐसा करना होगा कि आने वाले अगले हिंदी दिवस पर हमे अपनी भाषा पर गर्व हो। सोरेन ने कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों और आलोचकों से अपील की कि वे हिंदी के विकास के लिए अपने सुझाव दे, सरकार उन पर विचार करेगी। मौके पर मुख्यमंत्री ने पांच हिंदी के साहित्यकार और आलोचकों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में डॉ अशोक प्रियदर्शी, डॉ. खगेंद्र ठाकुर, डॉ मिथिलेश, महादेव टोप्पो और शिवशंकर मिश्र शामिल है। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन एस के सतपथी ने किया। मौके पर डॉ एके पांडेय सहित काफी संख्या में कॉलेज के प्राध्यापक और स्टूडेंट्स उपस्थित थे।
हिंदी का स्वरूप और भविष्य पर हुआ व्याख्यान

हिंदी दिवस के मौके पर एक व्याख्यान का भी आयोजन किया गया। इसका विषय 21वीं सदी में हिंदी का स्वरूप और भविष्य रखा गया था। इसमें प्रख्यात आलोचक डॉ खगेंद्र ठाकुर ने कहा कि हिंदी की चिंता क्यों की जा रही है। यदि इसे चर्चा का विषय बनाया गया तो यह बात तो तय है कि कहीं न कही हिंदी के भविष्य को लेकर हर किसी के मन में कोई न कोई चिंता की लकीर अवश्य है। अंग्रेजी के भविष्य को लेकर इस तरह की कोई विचार गोष्ठी नहीं होती है। उसका कारण यह है कि उसका वर्तमान बहुत उज्जवल है। डॉ मिथलेश ने कहा कि हिंदी का भविष्य भी कम उज्जवल नहीं है पर उसके वर्तमान पर कहीं कहीं चोट के निशान अवश्य है। किसी भी भाषा का स्वरूप उसका उपयोग करने वाले तय करते है। जहां तक हिंदी का प्रश्न है सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में तो यह पहले से ही लोकप्रिय है। व्याख्यान को साहित्यकार डॉ अशोक प्रियदर्शी सहित अन्य ने भी संबोधित किया।
फोटो - माणिक बोस।