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मुख्यमंत्री से मिले रेलवे चेयरमैन बोर्ड के अध्यक्ष

7 वर्ष पहले
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रेलवे ओवरब्रिज के रख-रखाव की जिम्मेवारी स्पष्ट होनी चाहिए
हटिया-बिरसा चैक के बीच रेलवे ओवरब्रिज को प्राथमिकता से बनाने
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को प्रोजेक्ट भवन स्थित अपने कार्यालय में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अरुणेंद्र कुमार के साथ हुई बैठक में कहा कि राज्य में लम्बित रेल परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी हेतु मुख्य सचिव, सचिव वित्त, परिवहन आयुक्त एवं रेलवे की एक कमिटी बनाई जाए। यह कमिटी दो दिनों के अंदर लम्बित परियोजनाओं की स्थिति, उस पर होने वाले संभावित व्यय, परियोजना के पूर्ण किए जाने की संभावित अवधि प्रतिवेदित करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कई वर्षों से रेल परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा पूर्व से ही राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। किसी भी परियोजना के कार्यान्वयन की अवधि इतनी लम्बी नहीं होनी चाहिए कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी बदल जाए और परियोजना पूर्ण न हो। चेयरमैन रेलवे बोर्ड द्वारा राशि की मांग किए जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेकों परियोजनाओं पर एक साथ कार्य करने से बेहतर होगा कि जो परियोजनाएं लगभग पूर्णता पर है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें। गठित कमिटी द्वारा दिए जाने वाले प्रतिवेदन के आधार पर जो परियोजनाएं पूर्णता पर हैं उनकी देय राशि सरकार देने पर विचार करेगी। छः योजनाओं के तहत ५६५ किमी रेल मार्ग का निर्माण किया जाना है, जिसके लिए राज्य सरकार दो हजार करोड़ रुपये दे चुकी है, परन्तु अब तक मात्र ३६५ किमी रेल मार्ग का निर्माण हुआ है। ससमय योजनाओं के पूर्ण नहीं करने पर इसकी लागत छः हजार करोड़ रुपये हो चुकी है जो झारखण्ड जैसे राज्य के लिए एक अतिरिक्त देयता है। झारखण्ड सरकार अब समिति द्वारा दिए जाने वाले प्रतिवेदन के आधार पर योजनावार एमओयू साइन करेगी तथा रेलवे जिस योजना के लिये राशि दी गई है उसी योजना पर राशि व्यय करना सुनिश्चित करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे बोर्ड के ससमय कार्य नहीं करने के कारण राज्य सरकार पर जो अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है इस विषय पर वे प्रधानमंत्री से मिलेंगे एवं रेलवे बोर्ड के कारण राज्य सरकार को होने वाले अतिरिक्त व्यय का वहन भारत सरकार द्वारा किए जाने का अनुरोध करेंगे।
उन्होंने कहा कि अब तक राज्य सरकार द्वारा दी गई राशि की उपयोगिता संबंधित प्रतिवेदन रेलवे बोर्ड द्वारा सरकार को उपलब्ध कराई जाए ताकि वित्तीय नियमों का उल्लंघन न हो।
कोंकण रेलवे द्वारा बनाए गए चौदह रेलवे ओवरब्रिज के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे ओवरब्रिज के रख-रखाव की जिम्मेवारी स्पष्ट होनी चाहिए। अनेकों रेलवे ओवरब्रिज जर्जर स्थिति में है एवं कांड्रा रेलवे ओवरब्रिज पूर्णतः ध्वस्त हो चुका है। इस विषय पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि औधोगिक प्रक्षेत्र के रेलवे ओवरब्रिज के ध्वस्त होने को रेलवे बोर्ड गंभीरता से ले। रेल ओवरब्रिज यदि दो साल की सेवा भी न दे पाए तो इसकी गंभीरता को देखते हुए रेलवे बोर्ड राज्य में बनाए गए सभी रेलवे ओवरब्रिज की वास्तविक स्थिति की जांच करा लें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी बीस साल में बढ़ने वाली आबादी एवं यातायात को ध्यान में रखते हुए रेलवे ओवरब्रिज का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड तैयार करें। हटिया-बिरसा चैक के बीच रेलवे ओवरब्रिज को प्राथमिकता से बनाने का उन्होंने सुझाव दिया ताकि आम लोगों को सुगम यातायात सुविधा उपलब्ध हो सके। उन्होंने वहां पर रेल मार्ग के अगल बगल की जगहों से अतिक्रमण को हटा कर आठ लेन की सड़क बनाने पर बल दिया।
झारखण्ड से रेल को सबसे अधिक राजस्व प्राप्त होता है, तदनुसार झारखण्ड को रेल की बेहतर सुविधा भी मिलनी चाहिए। रांची-दुमका एवं दुमका-रांची इंटरसिटी के समय का उल्लेख करते हुए कहा कि दुमका से रांची पहुंचने का समय सही नहीं है। दुमका राज्य की दूसरी राजधानी है, अनेक लोग कई कारणों से राजधानी रांची आते हैं, बूढ़े बुजुर्गों, बीमार यात्रियों की परेशानी को देखते हुए समय में परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने इस रेल के द्वितीय वातानुकूलित बागी की संख्या बढ़ाने तथा उसे बेहतर बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रेल के डिब्बों की स्थिति अच्छी होनी चाहिए। उन्होंने दुमका को हावड़ा से सीधा रेल संपर्क द्वारा जोड़े जाने पर बल दिया। बैठक में वित्त मंत्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह, मुख्य सचिव सुधीर प्रसाद, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अरुणेंद्र कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एसके सत्पथी, प्रधान सचिव वित्त राजबाला वर्मा, सचिव परिवहन केके सोन तथा समेत रेलवे के वरीय पदाधिकारीगण उपस्थित थे।