फोटो - पूछताछ के बाद योगेंद्र के चचेरे भाई पवन कुमार साव को जेपी सेंट्रल जेल ले जाती पुलिस।
रांची/हजारीबाग। नक्सली संगठन चलाने के आरोप से घिरे पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव मंगलवार को पुलिस को धोखा देकर गायब हो गए। उनसे पूछताछ की सारी पुलिसिया योजनाएं धरी की धरी रह गईं। आनन-फानन में योगेंद्र साव समेत तीन के खिलाफ अदालत ने वारंट जारी कर दिया है। कल गिरफ्तार हुए योगेंद्र के चचेरे भाई पवन कुमार साव को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया है।
तीन घंटे इंतजार के बाद पुलिस योगेंद्र साव की तलाश शुरू कर दी। पुलिस और मीडिया के लोग जब उनके हुडहुडू स्थित आवास पर पहुंचे तो उनके परिवार के एक भी सदस्य घर पर नहीं मिले। उनका सार्वजनिक
मोबाइल भी स्वीच्ड ऑफ है। अब पुलिस उन ठिकानों को चिन्हित कर छापामारी कर रही है, जहां उनके छुपे होने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक योगेंद्र और उनके सगे भाई धीरेंद्र को उनके पैतृक गांव पहरा में भी तलाशा गया।
पुलिस से खुद मांगा था आज का समय
पूर्व मंत्री से सोमवार को ही पूछताछ होनी थी, लेकिन उनके आग्रह पर एक दिन बाद यानी मंगलवार को सुबह 10 बजे का समय दिया गया था। तय समय के अनुसार डीएसपी एचएल रवि व सतीश चंद्र झा डीएसपी कार्यालय में योगेंद्र का इंतजार करते रहे, जबकि मामले के अनुसंधानक बड़कागांव के इंस्पेक्टर अवधेश सिंह सवालों की संचिका के साथ सदर थाने में योगेंद्र साव की राह ताकते रहे। सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बलों को सदर थाना में तैनात कर दिया गया था। लेकिन ना तो योगेंद्र साव पहुंचे और ना ही उनका कोई फोन ही आया।
पुलिस महकमे में यह चर्चा शुरू हो गई कि मंगलवार को अनुपस्थित रहकर योगेंद्र ने खुद पर लगे आरोपों की पुष्टि कर दी है। दोपहर तक थम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी संजय कुमार सिंह की अदालत से योगेंद्र, उनके भाई धीरेंद्र और चचेरे भाई पवन कुमार साव के खिलाफ वारंट जारी कर दिया गया। इधर गिरफ्तार पवन कुमार साव को पूछताछ के बाद मंगलवार को पुलिस ने जेपी केंद्रीय कारा भेज दिया। योगेंद्र साव और उसके सगे भाई की गिरफ्तारी को लेकर छापामारी अभियान तेज कर दिया गया है।
पवन ने कहा-राजकुमार से है परिचय
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ में अप्राथमिक अभियुक्त पवन कुमार साव ने आपराधिक संगठन चलाने वाले राजकुमार गुप्ता के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की है। हालांकि, टायगर ग्रुप और झारखंड़ बचाव आंदोलन में सीधी संलिप्ता से इंकार किया है। सीडीआर में राजकुमार गुप्ता और पवन कुमार साव के बीच हुई बातचीत की पुष्टि हुई है।
जेल जाते वक्त मीडिया के सामने पवन ने कहा कि वह निर्दोष है। उसने कहा, 'हम ठेकेदारी करते हैं। जेपीसी के विजय नामक व्यक्ति ने हमसे लेवी मांगी थी। अब उल्टा मेरे उपर ही लेवी वसूलने का आरोप लगाया जा रहा है। राजकुमार गुप्ता मुझसे लेवी मांगता था। इसी क्रम में उससे बातचीत हुई है। बाकी उसके ग्रुप से हमारा कोई लेना देना नहीं है।'
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फोटो - रवि।