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हाईकोर्ट ने पूछा सत्रह दागियों को कैसे बना दिया आइ एएस

7 वर्ष पहले
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रांची। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की प्रोन्नति के तरीके पर झारखंड हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं और इस संबंध में राज्य सरकार और यूपीएससी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। पूछा है कि सत्रह दागी लोगों को कैसे प्रोन्नति दी गई।
भवानी प्रसाद दास की एक याचिका पर सुनवाई
राज्य प्रशासनिक अधिकारी भवानी प्रसाद दास की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को कोर्ट ने यह आदेश दिया। दास की याचिका में कहा गया था कि एक ओर सरकार ने जानबूझकर उनके नाम की अनुशंसा यूपीएससी को नहीं भेजी जबकि दूसरी ओर सत्रह दागी अधिकारियों की प्रोन्नति के लिए नाम भेज दी, इन्हें इसी आधार पर आइ एएस बना भी दिया गया। प्रार्थी ने बताया कि उनका दस साल का रिकार्ड अच्छा रहा है, बीच में पांच माह का रिकार्ड अच्छा नहीं था जिसे बाद में संशोधित कर ठीक कर दिया गया। परंतु संशोधन की जानकारी राज्य सरकार ने यूपीएससी को नहीं दी जिसके कारण प्रोन्नति का लाभ लेने से वे वंचित रह गये।
लगे थे गंभीर आरोप
दूसरी ओर जिन अधिकारियों को प्रोन्नति दी गई उनमें तीन अधिकारी सतेन्द्र तिवारी, विनोद कुमार मिश्र तथा शशी भूषण सिंह पर गंभीर आरोप लगे थे। प्रार्थी की ओर से दिए गये दलील पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि दागियों को कैसे प्रोन्नति मिली। राज्य सरकार और केंद्र सरकार को चौदह अक्टूबर तक जवाब देने को कहा गया है। साथ ही वर्ष २०११ में आइ एएस के तीन पदों के विरुद्ध एक पद को इस मामले की अंतिम सुनवाई तक नहीं भरने का निर्देश दिया है।

कोर्ट को दी गई गल प्रोन्नति लेने वालों के नाम

प्रार्थी की ओर से बताया गया कि सत्रह दागी अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजे गये, और इन्हें इसी अनुशंसा के आलोक में आइ एएस बना दिया गया। इनमें सत्येन्द्र तिवारी, विनोद कुमार मिश्र, शशिरंजन सिंह, केएस श्रीवास्तव, विनोद शंकर सिंह, आरपी सिंह, सुरेन्द्र कुमार, सुमन कुमार, राजकुमार, मनोज कुमार, भगवान दास, शिवेन्द्र सिंह, विजय कुमारिसंह, उमेश प्रसाद सिंह, मनोज कुमार झा, बालेंदू भूषण, आनंद मूर्ति तथा दिनेश चंद्र मिश्रा शामिल हैं।
तैंतीस में 31 पदों पर दी गई प्रोन्नति

राज्य प्रशासनिक सेवा के ३१ पदाधिकारियों को आइ एएस पद पर प्रोन्नति दी गई है। ये प्रोन्नतियां वर्ष २०१० और २०११ की रिक्त पदों के विरुद्ध दी गई हैं। बचे हुए दो पदों में एक पद को सुरक्षित रखने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया है।