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स्टाइपेंड के लिए अभिभावकों पैन कार्ड नहीं, अंडरटेकिंग देना होगा

7 वर्ष पहले
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रांची। कल्याण विभाग द्वारा गरीब छात्रों को दी जानेवाली स्टाइपेंड अब सरकार के लिए बोझ बनते जा रही है। स्टाइपेंड के नाम पर लगातार हो रहे घोटाला को देखते हुए सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। यह कदम उनके लिए हैं, जो पोस्ट मैट्रिक के छात्र है। ऐसे छात्रों के अभिभावकों को अब पैन कार्ड मांगने की तैयारी की गयी थी। जिसे कल्याण सचिव सुनील वर्णवाल ने सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है। अब इसके बदले अभिभावकों को अपने है। ताकि गलत आय प्रमाण पत्र देकर स्टाइपेंड के नाम पर सरकारी राशि हड़पने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
मालूम हो कि अभी तक दो ऐसे मामले सबसे अधिक प्रकाश में आया है, जिसमें एक तो छात्रों द्वारा गलत आय प्रमाण पत्र देना और दूसरे राज्य के बाहर के संस्थानों में फजीर् एडमिशन के नाम पर स्टाइपेंड का निकासी करना। उक्त मामले पर तत्कालीन आदिवासी कल्याण आयुक्त प्रवीण कुमार टोप्पो द्वारा कल्याण विभाग के सचिव को पत्र लिखकर पैन कार्ड मांगने की जानकारी दी गयी थी। हालांकि, कल्याण सचिव की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में इसपर ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है।

90 फीसदी प्रमाण पत्र गलत
सरकार मानती है कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए एससी व एसटी के अभिभावक पारिवारिक आयुसीमा 2.5 लाख एवं पिछड़ी जाति के अभिभावक की वाषिर्क पारिवारिक आयुसीमा एक लाख रुपए निधार्रित की गयी है, लेकिन, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ी जाति के सभी छात्र छात्राओं के द्वारा अपने अभिभावकों का व्यवसाय या आय कृषि आधारित दिखाते हुए आय प्रमाण पत्र संबंधित जिले के अंचल कायार्लय से बना लिया जाता है, जो कि संभवत: 90 फीसदी गलत रहता है।

इसलिए जरूरी है पैन कार्ड
सरकार वर्ष 2014-15 से पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए अंचल कायार्लय से निर्गत आय प्रमाण पत्र को समाप्त किया जाए। इसके स्थान पर आवेदक छात्र छात्राओं से उनके पिता का पैन कार्ड नंबर मांगा जाए। जिससे कि उनके वास्तविक आय का पता चल सके। पिता के न रहने पर उस छात्र को छात्रवृत्ति के लिए विचार किया जा सकता है। ऑनलाइन आवेदन भरने के दौरान पैन कार्ड नंबर को अनिवार्य रूप से रखा जाए।

कल्याण पदाधिकारी को व्यक्तिगत जांच करना होगा

नयी व्यवस्था के तहत सरकार अब कल्याण पदाधिकारियों को नयी व्यवस्था देने जा रही है। इसके तहत राज्य के अंदर पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन पत्र में इस अनिवार्यता को उस हद तक छूट दिया जा सकता है जहां कि संबंधित जिला कल्याण पदाधिकारी ऐसे सभी छात्रों के अभिभावक के आय प्रमाण पत्र के संबंध में व्यक्तिगत रुप से जांच कर संतुष्ट हो कि उनकी आय सरकार की निर्धारित आय सीमा से कम है।