कलश स्थापना कल, विजयादशमी तीन को
नोट : मां दुर्गा की फाइल तस्वीर के साथ
कर्सर :<ह्यह्लह्म्शठ्ठद्द>कलश स्थापना के लिए शुभ है दोपहर १२.२६ बजे तक का समय
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<ह्यह्लह्म्शठ्ठद्द>भास्कर संवाददाता. रांचीह्यह्लह्म्शठ्ठद्द>
शारदीय नवरात्र २५ सितंबर से शुरू हो रहा है। इस दिन माता के भक्त अपने अपने घरों में और पूजा पंडालों में कलश स्थापन करेंगे। इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। इसी के साथ नवरात्र का पर्व शुरू हो जाएगा। जो तीन अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा। इस बार महाष्टमी और महानवमी दो अक्टूबर को ही पड़ रहा है। इसलिए नवरात्र की एक तिथि कम हो गयी है। पं कौशल किशोर मिश्र के अनुसार मां इस बार नौका पर आ रही हैं और अश्व पर गमन करेंगी। नवरात्र के पहले दिन हस्त नक्षत्र और ब्रह्मयोग पड़ रहा है। जो कलश स्थापना के लिए शुभ है। बताया कि बुधवार को दिन के ११ बजकर ६ मिनट से प्रतिपदा नक्षत्र भी शुरू होगा, जो गुरुवार को दोपहर १२.२६ बजे तक रहेगा। इस नक्षत्र में भी कलश स्थापित करना भक्तों के लिए शुभ होगा। हालांकि, दिन में कभी भी कलश की स्थापना की जा सकती है। नवरात्र की पूर्णाहुति दो या फिर तीन अक्टूबर को भी किया जा सकता है। क्योंकि दो अक्टूबर को सुबह ८.३० बजे से ही महानवमी शुरू होगा, जो तीन अक्टूबर को सुबह ६ बजकर २४ मिनट तक रहेगा। इसके बाद दशमी तिथि शुरु होगी। हालांकि, अधिकांश लोग तीन अक्टूबर को ही हवन करेंगे। क्योंकि इस दिन नवमी की उदयातिथि पड़ रही है।
<ह्यह्लह्म्शठ्ठद्द>०० पहले गणेश पूजा, फिर कलश स्थापनाह्यह्लह्म्शठ्ठद्द>
पं मिश्र ने कहा कि कोई भी गृहस्थ अपने घर में मां दुर्गा की अराधना के लिए स्वयं कलश स्थापना कर सकता है। इसके लिए जो तैयारी है वह इस प्रकार है। स्नान ध्यान करके घर के किसी हिस्से में पूजा की तैयारी करें। यहां पर मिट्टी, बालू मिलाकर जौ को छींट दें। फिर कलश में जल भरकर उसमें पंचरत्न, सिक्का, आम का पल्लव, धूप, सुपारी, पुष्प, सर्व औषधि, सप्त मृतिका इत्यादि पूजन सामग्री को डाल दें। सबसे पहले गणेश पूजन करें, फिर कलश स्थापना करना चाहिए। इसके बाद षोडश मातृका पूजन, नवग्रह पूजन, दुर्गा जी का पूजन करें। फिर पुष्पांजलि अपिर्त करें, कपूर से आरती करें। इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में फिर घी की आरती करें। शाम में मां की आराधना करें, भोग लगाएं और आरती करें।