कुड़ुख सोसायटी के प्रेसिडेंट डॉ. हरि उरांव की फाइल फोटो।
रांची। कुड़ुख भाषा के विकास को लेकर पोर्ट ब्लेयर में तीन दिवसीय नेशनल वर्कशॉप दो से चार अक्टूबर तक होगा। कुड़ुख लिटररी सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित वर्कशॉप में झारखंड से 45 शिक्षाविद शामिल होंगे। डॉ. महेश भगत के नेतृत्व में 33 शिक्षाविद सोमवार की सुबह पोर्ट ब्लेयर कशॉप में कुड़ुख भाषा के विकास को लेकर पॉलिसी बनाई जाएगी। ताकि पहले की तरह इस भाषा समुचित सम्मान मिल सके।
इसके अलावा कुड़ुख भाषा को संविधान की 6वीं अनुसूची में शामिल कराने, प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाई शुरू करने समेत अन्य एजेंडों पर चर्चा के बाद रणनीति तैयार की जाएगी। सोसाइटी के अनुसार इस वर्कशॉप में देश भर से कुड़ुख भाषा के जाने माने विद्वान भाग लेंगे। वर्कशॉप की तैयारी पूरी कर ली गई है।
ज्ञान का सागर है कुड़ुख
" कुड़ुख प्राचीन भाषा है। यह कई देशों में बोली जाती है। इस भाषा की कहानियों, कथाओं, चुटकुले सदियों पहले काफी लोकप्रिय थे। इस भाषा का व्याकरण काफी सुदृढ़ है। इस भाषा के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ाना वर्कशॉप का उद्देश्य है।" - डॉ. हरि उरांव, प्रेसिडेंट, कुड़ुख सोसायटी।