(साधु जीवन अपनाने के बाद निकली शोभायात्रा में शामिल जैन साधु व साध्वी।)
रांची। झारखंड के गिरिडीह जिला स्थित पारसनाथ के तलेटी तीर्थ के लिए आज का दिन अति पवित्र रहा। इस पवित्र भूमि पर पहली बार एक साथ 11 मुमुक्षुओं ने सांसारिक जीवन का त्याग कर पंच महाव्रत (वैराग्य) धारण कर लिया। इसकी खासियत यह भी रही कि इनमें से आठ युवतियां थीं, जिन्हें संसार का सुख रास नहीं आया तो उसे त्याग सफेद वस्त्रों को धारण कर जैन साध्वी बन गयीं।
दीक्षा के सभी विधान श्वेतांबर जैनियों के परमाचार्य कीर्तियश सूरीश्वर जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुए। गवाह बने सैकड़ों स्त्री पुरुष, जिनकी आंखें तो भरी हुई थी लेकिन चेहरे पर मुस्कान था। मुमुक्षुओं की खुशी देखते ही बन रही थी। मानों इन्हें जीवन का परम सुख मिल गया हो। श्वेतांबर साधु-साध्वी भी काफी संख्या में नव मुमुक्षुओं को आशीष दे रहे थे। संन्यास लेनेवाली युवतियां गुजरात के सूरत और अहमदाबाद की हैं। जबकि दो व्यक्ति मुंबई के रहनेवाले हैं।
इससे पूर्व शनिवार को मधुवन में सभी मुमुक्षुओं का वरघोड़ा (वर्षी दान यात्रा) निकाला गयी थी। सभी मुमुक्षु सांसारिक जीवन की इस अंतिम यात्रा में दूल्हा-दुल्हन की तरह अलग-अलग रथ पर सवार होकर निकले थे, जिनके दर्शन को मधुवन में भीड़ उमड़ी। ये सभी अपने दोनों हाथों से धन-संपत्ति, वस्त्रों को लुटाते हुए चल रहे थे। इसका संदेश यह था- इन सबसे हमारा कोई मोह नहीं है, मोक्ष की प्राप्ति के लिए साधु जीवन अपनाने जा रहे हैं।
शाम में आचार्य जी ने सभी को धर्म का प्रतीक रजोहरण सौंपा। मालूम हो कि झारखंड की धरती पर पहली बार एक साथ ग्यारह लोगों ने दीक्षा जीवन ग्रहण किया है। यह अपने आप में बड़ी घटना है।
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फोटो - पुष्पगीत।