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सेल की माइनिंग रोकने की सरकार की याचिका खारिज

7 वर्ष पहले
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हाईकोर्ट ने पूछा छह साल तक क्या कर रही थी सरकार
क्लियरेंस के लिए सेल को क्यों नहीं किया नोटिस
बीस जनवरी को होगी अपील पर सुनवाई
भास्कर संवाददाता, रांची
स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया (सेल )की माइनिंग लीज नवीकरण के मामले में राज्य सरकार को एक बार फिर करारा झटका लगा है। सेल की खदान से हो रही माइनिंग रोकने के लिए दायर अपील याचिका की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने न केवल सरकार की उस आग्रह को ठुकरा दिया जिसमें सेल के उत्खनन के आदेश पर स्टे लगाने का आग्रह किया गया था बल्कि सरकार की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि सेल के लीज नवीकरण आवेदन पर गत छह वर्ष छह माह से सरकार क्या कर रही थी। चीफ जस्टिस वीरेंद्र सिंह व जस्टिस डीएन पटेल की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि आवेदन दिए जाने के बाद लंबे समय तक सरकार ने कोई निर्णय क्यों नहीं लिया। अब इस मामले में सरकार कोर्ट को सेल की त्रुटियां बता रही है। सेल को खदान से उत्खनन के संबंध में एकलपीठ द्वारा दिए गये फैसले को बरकरार रखते हुए कोर्ट ने सरकार की मांग ठुकरा दी। अपील पर सुनवाई के लिए बीस जनवरी की तिथि निर्धारित की गई है।
उल्लेखनीय है कि इसके पहले भी हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार के पक्ष से असहमत होते हुए सेल के पक्ष में फैसला दिया था। सरकार को आदेश दिया गया था कि वह सेल का लीज नवीकरण एक सप्ताह में कर दे अथवा एक सप्ताह के बाद खदान से खनन के लिए स्वतंत्र होगा। कोर्ट के इस आदेश को सरकार ने चुनौती दी थी और एक आइए दायर कर सेल की माइनिंग रोकने का आग्रह किया था।
यह है मामला
एकीकृत बिहार में सेल को स्टील बनाने के लिए पश्चिम सिंहभूम के गुआ में दु्रगाईबुरु आयरन ओर माइंस का लीज २२ फरवरी १९४९ को ३० वर्ष के लिए दिया गया था। १९७९ में लीज अवधि समाप्त होने पर पुन: तीस वर्षों का लीज नवीकरण किया गया। यह लीज अवधि २२ फरवरी २००९ को समाप्त हो गई। इसके पहले सेल ने लीज नवीकरण के लिए २ फरवरी २००८ को एक आवेदन राज्य सरकार को दिया। पर इसपर कोई निर्णय वर्ष २०१४ तक नहीं हुआ। डीम्ड लीज के आधार पर ही सेल माइनिंग करता रहा। वर्ष २०१४ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिनरल्स कंसेसन रूल में केंद्र सरकार ने संशोधन किया। इस के तहत डीम्ड लीज की व्यवस्था समाप्त कर दी गई और जिन खदानों को लीज नहीं मिला है उसके खनन को अवैध मानते हुए इसपर तत्काल रोक लगाने की व्यवस्था की गई। इसी नियम के तहत राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर वैसे सभी खदानों को बंद करने का आदेश दिया जो लीज नवीकरण के आदेश के बिना चल रहे थे। सेल का माइंस भी इसके तहत बंद कर दिया गया। सेल ने सरकार के इसी आदेश को चुनौती दी और लीज नवीकरण की शर्तों को भी अनुचित बताते हुए लीज नवीकरण व खनन चालू करने का आदेश पारित करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने सेल का पक्ष सुनने के बाद अंतरिम राहत देते हुए सेल के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद सेल ने माइनिंग शुरु कर दी, इधर सरकार ने सेल के पक्ष में आए फैसले को कोर्ट में चुनौती दी और माइनिंग पर रोक लगाने का आग्रह किया। गुरुवार को सरकार की अपील याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माइनिंग पर रोक लगाने संबंधित आग्रह को खारिज कर दिया और अपील पर सुनवाई की अगली तिथि निर्धारित की।