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गंगा की दीर्घाकालिक स्वच्छता पर चर्चा

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली/रांची। ईए वॉटर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दीर्घकालिक स्वच्छ गंगा सम्मेलन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दीर्घकालिक स्वच्छ गंगा योजना को लागू करने की संभावनाओं और चुनौतियों को सबके सामने रखना था। सम्मेलन में सरकारी और उद्योग जगत के करीब 150 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
मुख्य मुद्दों पर चर्चा

सम्मेलन में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों, सलाहकारों, शोधकर्ताओं और जल विशेषज्ञों ने मिशन और उसके समाधान के जुड़े हुए मुख्य मुद्दों पर चर्चा की। सम्मेलन की अध्यक्षता आईआईटी, कानपुर के प्रोफेसर डॉ विनोद तारे ने की। उनके साथ नीदरलैंड के राजदूत अलफोनसुस, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष ए बी पांड्या, अपर यमुना बोर्ड के अपर सचिव एचके साहू और ईए वॉटर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य संचालन अधिकारी एच सुब्रह्मण्यम भी मौजूद थे।

स्वच्छ गंगा अभियान और गंगा नदी बेसिन प्रबंधन पर बोलते हुए डॉ तारे ने कहा कि देश के जल संसाधनों का समन्वित रूप से मिशन के विकास और प्रबंधन की दिशा में इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलनों का आयोजन बड़ी संख्या में किया जाना चाहिए।
पत्रिका का विमोचन

सम्मेलन में चस्वच्छ गंगा अभियान और संभावनाएं नाम की पत्रिका का विमोचन भी किया गया। यह मैगजीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ गंगा अभियान से जुड़ी नीतियों, अभियान के अपडेट औऱ मुख्य चुनौतियों पर केंद्रित है।
नई टेक्नोलॉजी पर जोर

सम्मेलन में पानी/अपशिष्ट पानी के क्वालिटी परीक्षण और निगरानी, सीवेज, इफ्युलेंट ट्रीटमेंट और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज की नई टेक्नोलॉजी के बारे में बताया गया। इसके साथ ही पैनल डिस्कशन का आयोजन भी किया गया। इस पैनल डिस्कशन में बतौर मुख्य वक्ता विश्व बैंक की जल और स्वच्छता विशेषज्ञ पूनम अहलुवालिया, एनजेएस इंजीनियर्स इंडिया के एमडी उदय केलकर और कनाडा हाई कमीशन की ट्रेड कमिश्नर टीना शीह उपस्थित रहीं।

सम्मेलन का आयोजन करने वाली ईए वॉटर प्राइवेट लिमिटेड पानी और अपशिष्ट जल प्रबंधन के क्षेत्र में भारत की केवल ज्ञान और विपणन समाधान प्रदाता है। इस कंपनी की स्थापना साल 2000 में की गई थी।
आगे देखें सम्मेलन के कुछ PHOTOS...