रांची। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग द्वारा शहरी क्षेत्र में दिए गए लाइसेंस के आधार पर चलाए जा रहे "हाता" को शहरी इलाके से हटाने के प्रस्ताव पर अब तक कोई फैसला नहीं हो सका है। इस व्यवस्था को समाप्त करने के लिए पिछले दिनों विभाग की ओर से मुख्य मंत्री सह विभागीय मंत्री को प्रस्ताव भेज गय था।
मुख्यमंत्री की अनुमति मिलने के बाद नए वित्तीय साल में "हाता" का लाइसेंस शहरी क्षेत्र के लिए नहीं मिल पाएगा। शहरी क्षेत्र में बार, रेस्तरां एवं क्लब के लाइसेंस की बंदोबस्ती प्रभावित होने की वजह से यह प्रस्ताव विभाग की ओर से भेजा गया था क्योंकि इसका सीधा असर सरकार के राजस्व पर पड़ रहा है।
क्या है "हाता"
कोई भी व्यक्ति शराब का सेवन विदेशी शराब की दुकान में नहीं कर सकता है। इसके लिए उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग द्वारा बार एवं क्लब को लाइसेंस दिया जाता है। क्लब में सिर्फ वहीं लोग जाकर शराब का सेवन करते हैं जो वहां के सदस्य हैं या किसी सदस्य के साथ क्लब गए हों। अन्य लोग बार में ही शराब का सेवन कर सकते हैं। लेकिन पिछले कुछ साल से विभाग ने भारत में बनाए गए विदेशी की खुदरा दुकानों को "हाता" का लाइसेंस देना शुरू कर दिया। इसके तहत खुदरा दुकानदार अपनी दुकान के पीछे बैठाकर शराब पीला सकता है। ऐसे में लोग बार में न जाकर हाता में भी शराब का सेवन कर सकते हैं।
"हाता" की संख्या सबसे ज्यादा राजधानी में है। यहां करीब 20 से ज्यादा की संख्या में "हाता" है। इससे बार की संख्या प्रभावित हो रही है। जो सीधे तौर पर राजस्व का नुकसान है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी "हाता" के लाइसेंस दिए गए हैं लेकिन इससे बार प्रभावित नहीं होते क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में बार की संख्या शुरू से ही नगण्य है।