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हार्डकोर अनिल सिंह ने डीजीपी के सामने किया कार्रबाइन के साथ किया सरेंडर

6 वर्ष पहले
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रांची। भाकपा माओवादी के हार्डकोर उग्रवादी 20 वर्षीय अनिल सिंह ने रविवार को झारखंड के घोर नक्सल प्रभावित खूंटी जिले के रनिया में डीजीपी राजीव कुमार के समक्ष एक कार्बाइन एवं एक रायफल के साथ सरेंडर कर दिया। वह पोड़ाहाट सबजोनल एरिया कमिटी का सचिव के रूप में काम कर रहा था। इसके खिलाफ नरिया, सोनुआ, टेबो थाने में उग्रवादी घटना से जुड़े पांच मामले दर्ज हैं। वह पिछले पांच साल से सक्रिय था। पहले वह पीएलएफआई के लिए काम करता था। डीजीपी ने उसे सरकार की नीति के तहत तत्काल 50 हजार रुपए दिए। मौके पर एडीजी अनिल पालटा, आईजी एमएस भाटिया एवं खूंटी एसपी अनीश गुप्ता भी मौजूद थे।

कुंदन पाहन समेत कई के साथ काम किया

सरेंडर करने वाले नक्सली अनिल ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि भाकपा माओवादी का कुख्यात नक्सली व जोनल कमांडर कुंदर पाहन संगठन छोड़ चुका है। अब उसने अपना एक अलग संगठन बना लिया है। वह अभी कहां है, उसके बारे में कुछ पता नहीं चल पा रहा है। सरेंडर करने के बाद अनिल सिंह ने कहा कि उसने माओवादियों के जोनल कमांडर कुंदन पाहन समेत कई नक्सली सरगनाओं के साथ काम किया है। कई शीर्ष नेताओं के साथ मिला भी है। लेकिन अब माओवादी संगठन में सिर्फ शोषण हो रहा है। नीचे के सदस्यों के साथ बड़े पद वालों का व्यवहार काफी बुरा है। संगठन विरोधी व्यवहार, अनुशासनहीनता और धनलोलुपता की वजह से लोग संगठन को छोड़ रहे हैं।
अपहरण कर शामिल करवाया था संगठन में
पुलिस के अभियान से भी जान को खतरा हो रहा है इसलिए उसने संगठन को छोड़कर मुख्य धारा में शामिल होने का निर्णय लिया। उसने बताया कि मैट्रिक पास करने के बाद 2010 में रांची के जेएन कॉलेज मे नाम लिखाया था। छह माह बाद पीएलएफआई के प्रकाश ने उसका अपहरण कर संगठन में शामिल करा लिया था बाद में वह छुट्टी पर घर आया और फिर माओवादी के संगठन में शामिल हो गया।

ठीक नहीं हैं उग्रवादियों का भविष्य

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डीजीपी राजीव कुमार ने कहा कि उग्रवादियों का भविष्य ठीक नहीं है। इसलिए वे अपनी भाग दौड़ की जिंदगी को छोड़ें और सरकार की सरेंडर नीति का लाभ लेते हुए सरेंडर करें। अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो न जाने कब पुलिस की गोली के शिकार हो जाएंगें। उन्होंने कहा कि पुलिस का अभियान लगातार चल रहा है। पुलिस की दबिश बढ़ती जा रही है। पिछले दो साल में नक्सली घटनाओं में भी काफी कमी आई है। नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल हो जाना चाहिए। उनके लिए और आकर्षक नीति तैयार की गई है, जिस पर सरकार पर निर्णय लेना है।
इस अवसर पर एडीजीपी आपरेशन अनिल पाल्टा, रांची जोन आइजी एमएस भाटिया, खूंटी एसपी अनीश गुप्ता, एएसपी आपरेशन पीआर मिश्र, एसडीएम रमेश घोलप, एसडीपीओ तोरपा अनुदीप सिंह, प्रशिक्षुयान डीएसपी रणवीर सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।
आगे देखें खूंटी के रनिया पहुंचे पुलिस अधिकारियों की और भी तस्वीरें -
फोटो : अनिमेष नचिकेता।