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एसएआर कोर्ट से हस्तांतरित जमीनों के मामले में हाईकोर्ट ने मांगी कंप्रहेंसिव रिपोर्ट

6 वर्ष पहले
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लीगल रिपोर्टर, रांची
आदिवासियों की जमीन गलत तरीके से कंपनसेशन कराकर गैर आदिवासियों के नाम हस्तांतरित किये जाने के आरोपों की सुनवाई के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने राजस्व सचिव को आठ सप्ताह के भीतर कंप्रहेंसिव रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस संबंध में दक्षिणी छोटानागपुर के कमिश्नर ने एक रिपोर्ट दी थी इसमें जमीन के गलत तरीके से हस्तांतरण की बात थी इस रिपोर्ट के आलोक में क्या किया गया, अभी कार्रवाई की क्या स्थिति है इसकी पूरी रिपोर्ट दें ताकि कोर्ट आरोपों के संबंध में समुचित आदेश पारित कर सके।
चीफ जस्टिस वीरेंद्र सिंह व जस्टिस अप रेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने सीएनटी बचाओ संघर्ष समिति की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की और दोनों पक्षों को सुनने के बाद सरकार से रिपोर्ट देने को कहा। इसके पहले सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से बताया गया कि एस एआर कोर्ट में अधिकारियों, कुछ अधिवक्ताओं और जमीन माफिया का तंत्र सक्रिय है। यह तंत्र गलत तरीके से आदिवासियों की जमीन का हस्तांतरण कराता है। इसके तहत करोड़ों रुपये का कारोबार हो रहा है। कई आदिवासियों को कुछ पता ही नहीं और उनकी जमीन कंपनसेशन के आधार पर हस्तांतरित हो जाती है। यह सीएनटी एक्ट का उल्लंघन है। इन गड़बडिय़ों का उल्लेख पूर्व में यहां के कमिश्नर ने किया था इसके बाद मामले की निगरानी जांच हो रही है। निगरानी ब्यूरो ने ११६ शिकायतों में केवल चार मामलों में पीई दायर किया है। जमीन के संरक्षण डीसी होते हैं पर उनकी जिम्मेदारी तय नहीं हो रही। सरकार की ओर से बताया गया कि जो शिकायतें मिली थीं इसके बाद जांच हो रही है। गड़बडिय़ों के मामले में अनुप शरण तथा मतियस विजय टोप्पो के विरुद्ध आरोप पाए गये थे। अभी जांच चल रही है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सरकार को रिपोर्ट देने का आदेश दिया और सुनवाई के लिए आठ सप्ताह बाद की तिथि रखी।