फोटो : जीते मेडलों को दिखाती मनीषा।
रांची। मैं अपने हक के पैसों के लिए तीन साल तक लड़ती रही। उनके सामने हाथ जोड़े। रोई भी। ताकि मां का इलाज करा सकूं। लेकिन इस मुर्दा सिस्टम से मैं हार गई। मां को नहीं बचा सकी। अब मां की अस्थियों के साथ स्वर्ण रेखा में अपने मेडल भी बहा दूंगी। यह आपबीती इंटरनेशनल लॉन बॉल खिलाड़ी मनीषा कुमारी श्रीवास्तव की है।
मनीषा के सर से पिता का साया पहले ही उठ चुका था। बीते दो फरवरी मां स्व. वीणा श्रीवास्तव की भी मौत हो गई। मनीषा कहती हैं कि अगर खेल विभाग मेरे जीते हुए मेडल का पैसा मुझे दे देता तो मैं अपनी मां को बचा लेती। लेकिन मेरे पास मंहगे इलाज के पैसे नहीं थे। अब मैं नहीं खेलूंगी।
एसोसिएशन ने धोखा दिया
मनीषा ने अपनी हालत का सबसे बड़ा जिम्मेदार झारखंड लॉन बॉलिंग एसोसिएशन को बताया है। मनीषा ने बताया कि एसोसिएशन ने पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को उन्होंने कमीशन लेकर पैसे दिला दिए और मुझे दिलासा देते रहे कि पदक के पैसे मिल जाएंगे। इतना ही नहीं 34वें नेशनल गेम्स में सिंगल्स सेमीफाइनल के दौरान मुझे उन्होंने लवली चौबे से हार ने को कहा। जब मैने मना किया तो मुझे एसोसिएशन की ओर से करियर बर्बाद करने की धमकी भी दी। इतना ही नहीं रांची का होते हुए भी उन्होंने मुझे बिहार से खेलने को मजबूर किया।
मदद के लिए प्रधानमंत्री को भी लिखी थी चिट्टी
मनीषा ने बताया कि बीते साल सितंबर में मैने मदद के लिए प्रधानमंत्री को भी चिट्टी लिखी थी, लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिल पाया। इसके बाद सीएम रघुवर दास से मिली। पर हर जगह से सिर्फ आश्वासन ही मिला। मदद कहीं से नहीं मिली।
तीन साल तक लगाती रही खेल विभाग का चक्कर
पदक के पैसों के लिए मनीषा तीन साल तक खेल विभाग का चक्कर लगाती रही। इस दौरान वह खेल मंत्री सुदेश महतो, खेल सचिव, खेल निदेशक के पास भी कई बार चक्कर लगाए। लेकिन सभी जगह सिर्फ भरोसा ही मिला। मदद के नाम एक बार खेल विभाग ने ३५ हजार रुपए दिए।
मनीषा की उपलब्धियां
1. साल 2006 में मनीषा ने लॉन बॉल खेलना शुरू किया। साल 2008 में असम में हुए पहले नेशनल बॉलिंग चैंपियनशिप में देश को पहला सिल्वर मेडल दिलाया। इसके बाद मनीषा का सलेक्शन इंडिया कैंप के लिए हुआ।
2. साल 2009 में मनीषा ने मलेशिया में हुए 13वें एशिया पेसेफिक बॉल्स चैंपियनशिप में भारत को लॉन बॉल में पहला ब्रांज मेडल दिलाया।
3. साल 2009 में चायना में हुए आठवें एशियन लॉन बॉल्स चैंपियनशिप से मनीषा ने अपने साथी खिलाड़ियों के साथ फोर में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया।
4. 2011 में 34वें नेशनल गेम्स में सिंगल्स में ब्रांज और डबल में सिल्वर मेडल जीता।
अागे देखें मेडलों के साथ मनीषा की दो और तस्वीरें -
फोटो : आदिल हसन।