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हजारीबाग गए हैं मेहमान परिंदे, छड़वा डैम है गुलजार

Dainik Bhaskar

Nov 23, 2015, 11:42 AM IST

हजारीबाग गए हैं मेहमान परिंदे, छड़वा डैम है गुलजार

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रांची/हजारीबाग। मंगोलिया और आसपास के क्षेत्रों से शीतकालीन प्रवासी (विंटर विजिटर) झारखंड के हजारीबाग जिले में आ गए हैं। हजारीबाग-कटकमसांडी मार्ग स्थित छड़वा डैम इनसे गुलजार हो गया है। यहां सुबह से शाम तक मेहमान परिंदों को कलरव करते देखा जा सकता है। सर्वाधिक संख्या में बार हेडेड गूज (धारीदार शिरवाला राजहंस) पहुंचे हैं। हजारों की संख्या में गूज अलग-अलग समूह में डैम के विभिन्न हिस्सों में दिख रहे हैं। जलीय प्रवासी पंक्षी ग्रेट केस्टेड ग्रेब, ग्रेट कॉरमोरेंट (बड़ा पनकौवा), ग्रे हेरॉन भी डैम में दिख रहे हैं।

गहरे पानी में डुबकी लगाकर बड़ी मछलियों का शिकार करने वाले पनकौवा पेड़ों पर बैठ कर अपने पंख सुखाते दिख रहे हैं। इन्हें मछलियों का माहिर शिकारी कहा जाता है। थोड़ी देर अवलोकन करने से ग्रेब को डुबकी लगाते देखा जा सकता है। शाम होने पर डैम के पक्षी आसपास के जंगल की ओर चले जाते हैं। अहले सुबह थोड़ी देर धान के कटे खेतों में बिचड़ा चुगते गूज का झुंड दिखता है। मंगोलिया से हजारीबाग आने की पुष्टि 2014 में झारखंड में हुए एशियन वाटरबर्ड सेंसर में हुई थी। मंगोलिया में टैग किए बार हेडेड गूज की पहचान कोनार डैम में की गई थी।

इनको मारने पर है सजा का प्रावधान

मेहमान परिंदों को भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में संरक्षित किया गया है। इन्हें मारने या नुकसान पहुंचाने वालों को तीन साल की सजा और जुर्माना किया जा सकता है। मेहमान परिंदों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की जानकारी वन्य प्राणी प्रमंडल हजारीबाग को दिया जा सकता है।
प्रवास का समय

प्रवासी पक्षी में परिवर्तन के अनुसार आते हैं। इनके आने का समय नवंबर-दिसंबर है। छड़वा डैम में इनका दल सात नवंबर के बाद से दिखने लगा है। तीन से चार महीने शीतकाल बिताने के बाद ये मार्च से अप्रैल के बीच अपने मूल स्थान लौटते हैं। प्रवास पर आने से पहले और वापस लौटते समय ये अपने शरीर में वसा की मात्रा जमा करते हैं। यही वसा उन्हें लंबी दूरी तय करने में ऊर्जा प्रदान करता है। रांची यूनिवर्सिटी के प्रो. वीसी सह जंतु विज्ञानी डॉ. एम रजिउद्दीन बताते हैं कि प्रवास पर निकलने वाले सभी पक्षी वसा जमा कर लेते हैं। इनमें जमा वसा के कारण ही इनके मांस को गर्म तासीर वाला बताया जाता है। डॉ. रजिउद्दीन बताते हैं कि किसी प्रकार का वसा खाने पर हमें गर्मी का अनुभव होता है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए दूरबीन से दिखता है सुंदर नजारा...

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