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खादी मेले में हो रहा ग्रामीण कुटीर उद्योग और हस्तशिल्प का जीवंत प्रदर्शन

5 वर्ष पहले
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फोटो कैप्शन : रांची के मोरहाबादी मैदान में चल रहे राष्ट्रीय खादी एवं सरस महोत्सव में लगा स्टॉल।
रांची। महात्मा गांधी के सपनों के अनुरूप आगे बढ़ते भारत और इसमें झारखंड के महत्वपूर्ण योगदान की झलक रांची के मोरहाबादी मैदान में चल रहे राष्ट्रीय खादी एवं सरस महोत्सव में देखने को मिल रही है। मेले में हर दिन ग्रामीण कुटीर उद्योग और हस्तशिल्प का जीवंत प्रदर्शन और उत्पादन हो रहा है।
इनमें ढेंकी से चावल तैयार करने और चाक पर मिट्टी के बर्तन तैयार करने जैसी ग्रामीण गतिविधियां भी शामिल हैं जो अब लुप्त प्राय हो चुकी हैं। इसके अलावा बांस से बनी चटाई, टोकरी,झाड़ू, मिटटी के बर्तन के निर्माण का भी लाइव डेमो मेले में चल रहा है।

सूत कातने से लेकर कपड़े तैयार करने तक का लाइव डेमोस्ट्रेशन

मेले में सूत कातने से लेकर कपड़े तैयार करने तक का लाइव डेमोस्ट्रेशन दिया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में खादी की मांग बढ़ी है, लोग पसंद करने लगे हैं लेकिन शायद कम लोग इसकी निर्माण प्रक्रिया से वाकिफ होंगे। सिमडेगा, चतरा, देवघर, सरायकेला खरसावां, बाग़बेड़ा जैसे दुर्गम क्षेत्रों से आई महिलाएं अपने काम के जरिये लोगो को खादी की उत्पादन प्रक्रिया में निहित परिश्रम, समय और लाभ से जुड़ी जानकारी दे रही हैं। ये महिलाएं एक शर्ट को मात्र आधे घंटे में तैयार कर लेती हैं। खादी के एक कपड़े की बिक्री करीब 20 लोगों के लिए रोजगार का जरिया बनती है।

स्वरोजगार शुरू करने के लिए मदद

मेले में लाइव डेमो दे रही महिलाओं ने बताया कि झारखण्ड राज्य खादी बोर्ड के साथ जुड़ने से पहले उनके पास काम नहीं था। बोर्ड के सहयोग से उन्हें प्रशिक्षण मिला और स्वरोजगार शुरू करने के लिए मदद भी। आज उनके बच्चे बेहतर शिक्षा पा रहे है और उनका जीवन स्तर भी काफी सुधर गया है। एक महीने में ये महिलाएं अपने दिन भर की मेहनत के बाद 7-10 हजार रुपये तक कमाई कर ले रही है।
लाइव डेमो के लिए कोडरमा से आई ट्रेनर केका सरकार ने बताया कि बोर्ड समय समय पर महिलाओं को अलग अलग काम की ट्रेनिंग देती है जिस से ग्रामीण महिलाओं का कौशल विकास हो सके और वो अपने जीवन को संवार सके। आज बोर्ड में हर जिले में सैडको महिलाएं काम कर रही हैं।
फोटो : पवन कुमार।
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