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झारखंड का भविष्य जनता पर छोड़ दिया जाए : बाबूलाल

9 वर्ष पहले
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रांची। झाविमो सुप्रीमो व पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में पार्टी का एक शिष्टमंडल बुधवार को राज्यपाल डा सैयद अहमद से मिला और विधानसभा भंग कर नया जनादेश का मार्ग प्रशस्त करने की मांग की। मरांडी ने कहा कि झारखंड का भविष्य अब जनता पर ही छोड़ देना चाहिए।


विगत 12 वर्षों में झाविमो को छोड़ सभी दलों का प्रत्यक्ष व प्रत्यक्ष तौर पर शासन रहा। 12 वर्षों में 5 बार भाजपा, तीन बार झामुमो (जिसमें दो बार नेतृत्व झामुमो का रहा) तथा आजसू आठ बार शासन में रहे। कांग्रेस तीन बार अप्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर शासन में रही। पिछली मुंडा सरकार भी कांग्रेस के कारण ही बनी। मगर अब तक कोई भी दल स्थाई सरकार जनता को देने में विफल रही।


मरांडी ने बिहार का उदाहरण देते हुए राज्यपाल को कहा कि वर्ष 2005-06 में बिहार विधानसभा के चुनाव में जनता ने खंडित जनादेश दिया था, नतीजन चुने हुए प्रतिनिधि शपथ भी नहीं ले पाए और कोई भी दल ने नहीं बना पाया। इसके बाद वहां एक वर्ष के अंदर में दूसरी बार चुनाव हुए। झारखंड में विगत 12 वर्षों से खंडित जनादेश के कारण कोई भी गठबंधन की सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई। वर्तमान मुंडा सरकार भी गिर चुकी है, ऐसी स्थिति में विधानसभा भंग कर नया जनादेश का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।


अगर नई सरकार बनने का मौका दिया जाता है या फिर विधानसभा को निलंबित रखा जाता है तो फिर से नया गठबंधन बनाने के लिए खरीद-फरोख्त का वातावरण बनेगा। पत्रकारों से बातचीत करते हुए मरांडी ने कहा कि वे कांग्रेस से निवेदन करते हैं कि अब वह किसी तरह का प्रयोग झारखंड में न करें और नए जनादेश की ओर चलें, अगर नई सरकार बनती है तो निश्चित ही वह खरीद-फरोख्त की बुनियाद पर बनेगी।


मरांडी के साथ विधायक दल नेता प्रदीप यादव, विधायक अरविंद सिंह, निर्भय शाहबादी, सबा अहमद, जोबा मांझी, दुलाल भुईंया, गौतम सागर राणा, संजय चौबे, रमेश राही, नागेंद्र महतो, श्रीराम दूबे, संतोष कुमार, सरोज सिंह, खालीद खलील, सुनील साहू, प्रभात कुमार भुईंया सहित कई शामिल थे। इधर मरांडी की अध्यक्षता में बुधवार को पार्टी पदाधिकारियों, सांसद, विधायकों व मंच-मोर्चा के अध्यक्षों की बैठक हुई जिसमें वर्तमान राजनीति हालात पर चर्चा की गई।