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भागवत कथा : मित्रता हो तो कृष्ण सुदामा जैसी

9 वर्ष पहले
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रांची. मित्रता संसार का सबसे अनमोल रिश्ता है। सभी लोग इस रिश्ते की अहमियत नहीं समझते हैं। गुरू के आश्रम में कृष्ण और सुदामा की मित्रता हुई। बाद में कृष्ण द्वारका के राजा बने और सुदामा गरीब बाह्मण ही रहा। एक दिन वह कृष्ण के पास यह सोचता हुआ पहुंचा कि पता नहीं कृष्ण उन्हें पहचानें या न पहचानें लेकिन कृष्ण ने दौड़कर उसे गले लगाया। अपनी धन संपत्ति भी उसे दी।

मित्रता के रिश्ते की यह कथा सोमवार को भागवत कथा के अंतिम दिन स्वामी सदानंद महाराज ने सुनाई। श्रीकृष्ण प्रणामी सेवा संस्थान के तत्वावधान में अग्रसेन भवन में आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कृष्ण सुदामा की सजीव झांकियों ने सबका मनोरंजन किया। इस अवसर पर परीक्षित मोक्ष की कथा भी सुनाई गई। कथा का समापन आरती के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जगदीश प्रसाद छावनिका, जुगल किशोर जाजोदिया, विजय जालान, गिरधारी लाल चौधरी, डूंगरमल अग्रवाल, विधा अग्रवाल, उमा जालान आदि के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।