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शक बदला यकीन में, घटना के दिन ही मार डाला गया था उद्योगपति को

9 वर्ष पहले
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नौकरी से निकाले जाने के कारण टपका दिया उद्योगपति को। हत्या करने के बाद फिरौती मांगने की बनाई थी योजना। पांच अपराधियों ने मिलकर दिया घटना को अंजाम।

रांची। कोकर के अपहृत उद्योगपति ज्ञानचंद जैन उर्फ ज्ञानचंद सेठी की गुरुवार को इटकी थाना क्षेत्र के कुल्ली गांव के नजदीक खंबा जंगल से लाश बरामद कर ली गई। पत्थर से कूच कर उनकी नृशंस हत्या कर दी गई। उनकी हत्या घटना के दिन ही यानी 14 फरवरी को ही कर दी गई थी। इस कांड में शामिल तीन अपराधियों की निशानदेही पर जमींदोज जैन की लाश बरामद की गई। उनकी लाश गुरुवार को दिन के साढ़े दस बजे पुलिस अपने कब्जे में कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेजा। रिम्स में उनका पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम से खुलासा हुआ है कि उनकी हत्या 14 फरवरी को ही कर दी गई थी। उनके सिर और सीने पर भोथरे हथियार से प्रहार किया गया था, जिससे उनकी मौत हो गई। अपहृत जैन की हत्या कर दिए जाने की फैली खबर के बाद राजधानी में गुरुवार को सनसनी फैल गई। चेंबर की अपील पर दुकानें बंद हो गई। भाजपा नेताओं ने कोकर में मोटरसाइकिल जुलूस निकाला। हर कोई जैन की हत्या से मर्माहत थे। इधर, पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही जैन की लाश उनके कोकर बैंक कालोनी स्थित घर में लाई गई कि वहां कोहराम मच गया। सबसे ज्यादा स्थिति खराब उनकी पत्नी शकुंतला की थी। बेटा पंकज और बहू सरिता का भी रो रो कर बुरा हाल था। बेटी सोनिका मूर्छित हो जा रही थी।
गिरफ्तार अपराधियों ने कबूला जुर्म
रांची के सीनियर एसपी साकेत कुमार सिंह ने गुरुवार की शाम आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में जैन अपहरण कांड का खुलासा करते हुए बताया कि इस कांड का मुख्य सूत्रधार उनका निजी कार चालक मुकेश केसरी उर्फ बंटी ही निकला। जैन का अपहरण और उनकी हत्या करने में शामिल सूरज महतो (सिमलिया, नावाटोली, रातू), विकास तुरी (पेटरवार, बोकारो, वर्तमान में चुटिया) एवं मधु उरांव उर्फ मतल (खिरदा, बेड़ो) को गिरफ्तार कर लिया गया है। सूत्रधार कार चालक मुकेश केसरी और प्रेम फरार है। इन दोनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयासरत है। गिरफ्तार तीनों अपराधियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। तीनों ने पुलिस को दिए अपने बयान में खुलासा किया है कि सूरज महतो को नौकरी से निकाल दी गई थी। वहीं विकास तुरी जैन की फैक्ट्री में नौकरी मांगने गया था, पर उसे नौकरी नहीं मिली थी। वहीं कार चालक मुकेश केसरी को भी काम से निकाल दिया गया था। इस कारण उद्योगपति ज्ञानचंद जैन का अपहरण कर उनकी हत्या कर देने की योजना बनाई गई। यह योजना घटना से 10 दिन पहले बनाई गई थी। जैन की हत्या करने के बाद उनके परिवार के सदस्यों से फिरौती मांगने की भी योजना थी, किंतु इससे पहले ही हत्यारे पुलिस के हत्थे चढ़ गए। योजना के अनुसार कार चालक मुकेश केसरी ही जैन के घर में फोन कर फिरौती मांगता। उससे कहा गया था कि वह फोन पर यह बताए कि अपहर्ताओं ने दोनों को अलग अलग रखा है।
मेजर कोठी के पास से किया गया था अगवा
गिरफ्तार अपराधियों ने खुलासा किया है कि रांची नगड़ी रोड पर मेजर कोठी के पास से उद्योगपति ज्ञानचंद जैन का अपहरण किया गया था। पहले से तय योजना के मुताबिक वहां पहले से सूरज महतो, विकास तुरी एवं मधु उरांव उर्फ मतल खड़े थे। वहीं कार चालक मुकेश उद्योगपति जैन के लेकर आने वाला था। मेजर कोठी के पास जैसे ही जैन पहुंचे कि कार रोक दी गई। कार के पीछे सीट पर जैन बैठे हुए थे। कार के दाहिने ओर से सूरज और बायीं ओर से मधु उरांव बैठ गया। वहीं कुछ दूर आगे जाने पर विकास खुद स्टेयरिंग संभाल लिया। कहते हैं कि कार के अंदर ही जैन के सिर पर पिस्तौल के बट से कई बार प्रहार किया गया। वह बेहोश हो गए। इसके बाद अपहृत जैन को इटकी थाना क्षेत्र के कुल्ली गांव के नजदीक खंबा जंगल में ले जाया गया। उसी रोज पत्थर से कूच कर उनकी हत्या कर दी गई और लाश को दफना दिया गया। इसके बाद जैन की कार लेकर विकास और मधु उरांव गुमला चला गया। गुमला के कसिरा जंगल में कार छोड़ दी। 17 फरवरी को कार बरामद कर ली गई थी।
ऐसे हुआ खुलासा
जैन अपहरण कांड में जुटी रांची पुलिस वैसे कुछ लोगों के बारे में पता करना शुरू किया जिन्हें जैन की फैक्ट्री से काम से निकाला