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आरयू ही नहीं बचाना चाहता एसएसएम कॉलेज की जमीन एएस मेमोरियल कॉलेज की भूमि नहीं बचाना चाहता आरयू, , कहा किराए पर ली गई थी कॉलेज की भूमि

9 वर्ष पहले
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रांची। एसएस मेमोरियल कॉलेज की जमीन को बचाने के लिए रांची यूनिवर्सिटी गंभीर नहीं है। जिस भूमि के लिए सीनेट से सड़क तक हंगामा हुआ, उसे आरयू प्रशासन किराए पर लिया गया बता रहा है। इसे लेकर विवि के प्रस्ताव पर कॉलेज प्रबंधन ने विरोध जताया है।


आरयू प्रशासन ने कॉलेज की जमीन बचाने की बात कहते हुए प्रस्ताव तैयार किया है। इसी को बेस बनाकर कोर्ट में याचिका दायर करने की योजना थी। आरयू प्रशासन के अनुसार कानूनी सलाह के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव में विवि प्रशासन ने कहा है कि उक्त जमीन किराए पर ली गई थी।


विवि प्रशासन ने अपने प्रस्ताव पर सहमति के लिए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रणजीत सिंह को आरयू मुख्यालय में बुलाया था। मगर प्राचार्य ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किया। उन्होंने कहा कि कॉलेज में इस तरह का कोई रिकॉर्ड नहीं है, जिसमें उक्त भूमि पर किराए पर लेने की बात कही गई हो। इधर, शिक्षकों का कहना है कि समझ में नहीं आता कि विवि प्रशासन ने इतना आधारहीन प्रस्ताव क्यों तैयार किया? जबकि उसके पास तो कानूनी सहयोग के लिए लीगल सेल और अधिवक्ता हैं।


सिल्ली राजा से हुआ था एग्रीमेंट


सिल्ली राजा और कॉलेज प्रबंधन के बीच भूमि का एग्रीमेंट हुआ था। तब प्रिंसिपल डॉ. कमलेश्वर और सचिव कामाख्या नारायण सिंह थे। कामाख्या सिंह के पुत्र डॉ. जीतेंद्र सिंह बताते हैं कि एग्रीमेंट में था कि तय समय में रजिस्ट्री नहीं कराने पर 12 प्रतिशत ब्याज के साथ शेष राशि कॉलेज को देनी होगी। इसके बाद ही रजिस्ट्री होगी। इस बीच 1980 में कॉलेज को सरकार ने टेकओवर कर कर लिया। इसके बाद आरयू ने रजिस्ट्री नहीं कराई। चार माह पहले उक्त भूमि को सिल्ली राजा के परिजन ने कमल सिंघानिया को बेच दिया। इस पर हंगामा हुआ था।


हो सकता है सुधार


"कानूनी सलाह के बाद एसएस मेमोरियल कॉलेज की भूमि को बचाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। अगर त्रुटि होगी, तो सुधार करेंगे। प्रस्ताव वापस भी हो सकता है।" - डॉ. एके चौधरी, रजिस्ट्रार आरयू


प्रस्ताव से सहमत नहीं


"आरयू के प्रस्ताव से मैं सहमत नहीं हूं। इसलिए हस्ताक्षर नहीं किया। भूमि को रेंट पर लेने से संबंधित कोई रिकॉर्ड मेरे पास नहीं है।" - डॉ. रणजीत सिंह, प्राचार्य, एसएसएम कॉलेज


आरयू के प्रस्ताव पर उठ रहे सवाल


> भूमि किराए पर लेने का दस्तावेज नहीं, तो कैसे तैयार हुआ प्रस्ताव?
> अगर प्रस्ताव को सही मान लिया जाएगा, तो भूमि के स्वामी को स्थापना काल से अब तक का रेंट देना होगा।
> आरयू के पास भूमि के स्वामी से एग्रीमेंट का दस्तावेज है। ऐसे में इसे आधार क्यों नहीं बनाया गया?