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- अपने बच्चों को भी मृत मां से मिलाने श्मशान लेकर जाता था नरबलि देने वाला हवलदार
अपने बच्चों को भी मृत मां से मिलाने श्मशान लेकर जाता था नरबलि देने वाला हवलदार
धनबाद/रांची। छोटा-सा घर। एक बेडरूम और एक ही बेड। उसी में चारों ओर से नरमुंडों से घिरी मां काली की प्रतिमा। आम बच्चे इन्हें देख डर जाते, लेकिन बलि के लिए दो सगी बहनों के अपहरण के आरोपी हवलदार मुनीलाल के बच्चे इनसे बेखौफ हैं। उसकी सात साल की बेटी कांति कहती है कि वह जन्म से ही कंकाल देख रही है। उसे यह न डरावना लगता है और न ही अजीब। मुनीलाल अपने बच्चों को श्मशान भी ले जाता था, उनकी मृत मां से मिलाने। वह बच्चों से अक्सर कहता था, जब भी उन्हें मां की याद आए, वह उनसे मिलवा देगा। मुनीलाल की पत्नी विद्यावती की मौत डेढ़ साल पहले हो गई थी। शव को जलाने के बजाय मुनीलाल ने उसे दफना दिया था। हवलदार के बेटे योगेंद्र ने बताया कि वह अपने भाई-बहनों के साथ कई बार श्मशान जा चुका है। पिताजी मां की कब्र के पास आंखें मूंदकर घंटों बुदबुदाते रहते थे। उनके हाव-भाव देख हम वैसा ही करते थे, जो वे कहते थे।
कोलकाता में सीखी तंत्र विद्या
हवलदार मुनीलाल बिहार के सिवान जिले का रहने वाला है। आरपीएफ में नौकरी से पहले वह गांव में ही रहता था। उसके करीबी लोगों ने बताया कि मुनीलाल के एक बेटे और एक बेटी की मौत 35 साल पहले हो गई थी। उसने एक तांत्रिक से संपर्क किया था। तांत्रिक ने उसे बताया था कि उस पर भूत-प्रेत की छाया है। तांत्रिक के कहने पर ही मुनीलाल ने भी तंत्र विद्या सीखने का निर्णय लिया और कोलकाता पहुंच गया। वहां वह तीन साल रहा। इसी बीच उसे आरपीएफ में उसे नौकरी मिल गई। मुनीलाल की पांच बेटियां और दो बेटे हैं।
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