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डाउनलोड करेंदुमका/रांची। झारखंड में 18 विधानसभा सीटों वाला संथालपरगना प्रमंडल 1980 के दशक में झारखंड मुक्ति मोर्चा का मजबूत गढ़ रहा है। आगामी विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और झारखंड विकास मोर्चा ने झामुमो को कड़ी चुनौती देने को लेकर कवायद शुरू कर दी है।
झाविमो विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से चुनाव में झामुमो को गहरी शिकस्त देने की योजना बना रहा है और आरोपो में फंसे झामुमो को खेदडऩे का आह्वान जनता से कर रही है।
वहीं भाजपा अपने कार्यकर्ताओं के बलबूते एक बार फिर झामुमो को टक्कर देने की तैयारी में जुट गया है।इस बार गोड्डा के सांसद निशिकांत दूबे संतालपरगना में भाजपा कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने में लगे हैं और पूरे प्रमंडल से झामुमो को उखाड़ फेंकने का दावा कर रहे हैं।वर्ष 2009 में सम्पन्न विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र से झामुमो के दस, भाजपा के दो, झाविमो के दो राष्ट्रीय जनतादल के दो कांग्रेस के एक और निर्दलीय एक विधायक निर्वाचित हुए थे। इससे पहले वर्ष 2005 में सम्पन्न चुनाव में संथालपरगना को अपनी कर्मभूमि माननेवाले प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी द्वारा इस क्षेत्र में किये गये विकास के बल पर भाजपा और जनतादल यूनाइटेड ने आठ सीटों पर कब्जा जमाया था जबकि झामुमो को इस चुनाव में पांच सीटों से ही संतोष करना पड़ा था।वर्ष 2005 में कांग्रेस को दो राजद को एक और हरिनारायण राय एवं प्रो. स्टीफन मरांडी बतौर निर्दलीय निर्वाचित हुए थे।
इस चुनाव में झामुमो सुप्रीमो के दोनों पुत्र दुर्गा सोरेन दिवंगत और हेमंत सोरेन भी पराजित हो गये थे।पिछले लोकसभा चुनाव में संथालपरगना की तीन सीटों में से दो सीटों पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया था।हाल के दिनों में संथालपरगना की कर्मभूमि समझनेवाले झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में संगठन की ओर से आदिवासी सम्मेलन और आदिवासी छात्रों के छात्रावास की दयनीय स्थिति में सुधार की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन आयोजित करके झामुमो के परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी करने का प्रयास किया जा रहा है।
हाल के दिनों में झाविमो और भाजपा हॉर्स ट्रेङ्क्षडग एवं बीच घोटाला मामले में झामुमो के तीन विधायकों सीता सोरेन, साईमन मरांडी और पूर्व मंत्री नलिन सोरेन के आरोपी होने और फरार होने से झामुमो की परेशानी बढ़ गयी है।झाविमो और भाजपा इससे मुद्दा बनाकर वोट बटोरने की जुगत में है। हालांकि झामुमो भी अपने संगठन के बल पर अपनी ताकत को मजबूत बनाने की दिशा में अग्रसर है।
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