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गड़ा तो गड़ा ही रह गया परशुराम का फरसा, फिर जिसने भी छेड़ा मिली सजा-ए-मौत!

8 वर्ष पहले
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रांची/गुमला। त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम ने जनकपुर में आयोजित सीता माता के स्वयंवर में शिव जी का धनुष तोड़ा तो वहां पहुंचे भगवान परशुराम काफी क्रोधित हो गए। इस दौरान लक्ष्मण से उनकी लंबी बहस हुई।

बहस के बीच में ही जब परशुराम को पता चला कि भगवान श्रीराम स्वयं नारायण ही हैं तो उन्हें बड़ी आत्मग्लानि हुई। शर्म के मारे वे वहां से निकल गए और पश्चाताप करने के लिए घने जंगलों के बीच एक पर्वत श्रृंखला में आ गए। यहां वे भगवान शिव की स्थापना कर आराधना करने लगे। बगल में उन्होंने अपना परशु अर्थात फरसे को गाड़ दिया।


कहां गाड़ा गया था फरसा, आज क्या है उसकी हालत...जानने के लिए देखें आगे की स्लाइड्स...


फोटो- दुर्जय पासवान।

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