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डाउनलोड करेंरांची/चक्रधरपुर। माओवादियों के 24 घंटे की बंदी का खौफ आम आदमी के अलावा पुलिस पर भी छाया रहा। माओवादियों ने बंदी के दौरान दहशत फैलाने के लिए नया ठिकाना झरझरा इलाके को चुना। इस इलाके में जानेवाली सड़क पर नक्सलियों ने पहली बार बाइपीड़ से माइलपीड़ तक बैनर-पोस्टर साटा।
इस इलाके में दहशत का आलम यह था कि चक्रधरपुर थाना प्रभारी सकलदेव राम सदल बल सुरूबुढ़ा पुलिया तक पोस्टर उखाड़ते हुए गए, लेकिन झरझरा नहीं जा सके। झरझरा में दिन भी बिरसा मुंडा की शहीद वेदी पर बैनर लहराता रहा। दूसरी और एनएच 75 के टेबो थाना से एक किमी दूरी पर कितीदीरी में माओवादियों ने बैनर टांग दिया और पोस्टर साटते हुए पत्थरों को एनएच पर रख दिया। इसे हटाने के लिए एएसपी सुरेंद्र झा और सीआरपीएफ के कमांडेंट सैकड़ों जवानों के साथ पहुंचे। इस दौरान एएसपी ने बैनर पर पत्थर चलाकर यह जानना चाहा कि कहीं इसके पास बम तो प्लांट नहीं किया गया है? कुल मिलाकर पूरे अनुमंडल में नक्सली बंद का असर दिखा।
रात को साटा पोस्टर
झरझरा में युवकों ने बताया कि आधी रात को 5 से 6 बाइक की आवाज आई थी। उसके बाद सुबह देखा तो बाजार में पोस्टर बैनर साट दिया गया है। बाइक की आवाज बांझीकुसूम,बाइपीड़,झरझरा रूट के लोगों ने भी आधी रात को सुनी।
स्नानघाट में भी पोस्टर
बांझीकुसूम-झरझरा पथ पर माओवादियों ने बैनर व पोस्टर साटे थे। इससे पहले इतना ज्यादा पोस्टर-बैनर कभी नहीं दिखा। झरझरा में दिन भी बैनर पोस्टर सटा रहा। दूसरी और मोहूलबोराई के पास एक तालाब के स्नानघाट के पास भी पोस्टर साट दिया गया था। सुबह सुबह ही पुलिस ने बाइपीड़ मोड़, केरा चौक, मोहूलबोराई से लेकर सुरूबुढ़ा पुलिया तक पोस्टर व बैनर उखाड़ा।
टेबो थाना के करीब एक किमी दूर एनएच 75 स्थित तेरदिरी में पोस्टर-बैनर व एनएच 75 को बोल्डर से जाम कर दिया गया था। घाटी में गाडिय़ां नहीं चलीं। सूचना मिलने के बाद एएसपी सुरेन्द्र कुमार झा, हेसाडीह सीआरपीएफ 60 बटालियन के सहायक कमांडेंट राजीव कुमार ढाका, टेबो थाना प्रभारी एन लकड़ा वहां पहुंचे और पोस्टर व बैनरों को अपने कब्जे में कर लिया।
यात्री ट्रेनों के आगे चली पायलट ट्रेन
इधर माओवादी बंदी के दौरान हावड़ा-मुंबई रेलमार्ग पर पूरी सुरक्षा बरती जा रही है। यात्री ट्रेनों के आगे पायलट ट्रेन चलाई जा रही है। हर ट्रेन में पेट्रोलिंग फोर्स रखा गया है। कंट्रोल रूम से रेल मंडल की सभी रेल लाइनों पर निगाह रखी जा रही है।
नक्सलियों द्वारा आहूत बंद से जिंदगी की रफ्तार पूरी तरह थमी रही। नक्सली खौफ के कारण गोइलकेरा बाजार की तमाम दुकानें सुबह से बंद रहीं। आगे की स्लाईड्स पर -
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