पहचान छिपाकर रहता था यह मोस्ट वांटेड, लोगों से यूं हाथ जोड़कर मांगी माफी / पहचान छिपाकर रहता था यह मोस्ट वांटेड, लोगों से यूं हाथ जोड़कर मांगी माफी

पहचान छिपाकर रहता था यह मोस्ट वांटेड, लोगों से यूं हाथ जोड़कर मांगी माफी

Gupteshwar Kumar

May 14, 2017, 02:42 PM IST
नक्सली कुंदन पाहन ने अपने गुहा नक्सली कुंदन पाहन ने अपने गुहा
रांची। पुलिस रविवार को झारखंड के मोस्ट वांटेड और 15 लाख रुपए के इनामी नक्सली कुंदन पाहन को मीडिया के समक्ष लेकर आई। इस दौरान कुंदन ने अपने गुहानों के लिए लोगों से हाथ जोड़ कर माफी मांगी।

-कुंदन अपनी पहचान छिपाने में काफी माहिर था। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सालों बाद भी मोस्ट वांटेड लिस्ट में शीर्ष पर रहते हुए भी पुलिस उसकी कोई फोटो हासिल नहीं कर पाई थी।
-रविवार को एडीजी अभियान आरके मल्लिक के समक्ष कुंदन पाहन ने सरेंडर किया। पुलिस ने कुंदन को 15 लाख रुपए का चेक सौंपा।
-कुंदन पहले ही पुलिस को बता चुका है कि पुलिस से लूटे ज्यादातर हथियार सारंडा में नक्सलियों के पास हैं। उसके कई पुलिस अधिकारियों से गहरे ताल्लुकात रहे हैं।
-इस आधार पर पुलिस की टीम नक्सल प्रभावित खूंटी, रांची, लोहरदगा, गुमला, सारंडा, पूर्वी सिंहभूम और बंगाल से सटे इलाकों में छापेमारी कर रही है।
-इधर, तमाड़ के आजसू विधायक विकास मुंडा कुंदन पाहन के सरेंडर कराने के तरीके से नाराज हैं। कुंदन उनके पिता रमेश मुंडा की हत्या का मुख्य आरोपी है।

उसके खिलाफ ऑपरेशन शुरू होने से पहले मिल जाती थी जानकारी
-कुंदन ने बताया कि पुलिस जब उसके खिलाफ ऑपरेशन शुरू करती थी, इसकी जानकारी उसे पहले ही मिल जाती थी। कई पुलिसकर्मी भी उसके संपर्क में रहते थे।
-बताया कि आईसीआईसीआई बैंक से लूटे पांच करोड़ से ज्यादा की रकम और लगभग सवा किलो सोना उसने अपने कारोबार में लगाया है।
-बुंडू, तमाड़, अड़की सहित पूर्वी पश्चिमी सिंहभूम, ओड़िशा के कई कारोबारियों को उसने सूद पर मोटी रकम दी है। उसे हर महीने कारोबारियों से सूद के पैसे मिलते थे।
-बैंक के पांच करोड़ सोना लूटे जाने के बाद नक्सली कुंदन पाहन का अपने करीबी राजेश टोप्पो से रुपए के बंटवारे को लेकर अनबन हो गई थी।
-इसके बाद राजेश ने अलग दस्ता बना लिया था। उसने राहे में पांच पुलिस पुलिसकर्मियों की हत्या कर हथियार लूटने के साथ ही संगठन को अपनी ताकत का अहसास कराया।
-इसके बाद संगठन के शीर्ष नेता उसे ज्यादा तरजीह देने लगे। संगठन में राजेश के बढ़ते प्रभाव से कुंदन खिन्न हो गया और उसने झांसा देकर उसे अड़की के जंगल में बुला कर उसे मार डाला।
-राजेश के शव को रांची-टाटा हाईवे के किनारे फेंक दिया गया। पुलिस ने समझा कि वह मुठभेड़ में मारा गया है। लेकिन राजेश के मारे जाने की सच्चाई संगठन के शीर्ष नेताओं तक पहुंच गई।
-इसके बाद से ही कुंदन पाहन की पकड़ संगठन में कमजोर होती चली गई। संगठन में तरजीह नहीं मिलने की वजह से कुंदन परेशान रहने लगा।
-बाद में उसे संगठन से निकाल भी दिया गया। इसके बाद ही वह अलग-थलग पड़ गया और शारीरिक रूप से भी कमजोर भी हो गया। परिवार के लोग भी चाहते थे कि वह सरेंडर कर दे।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए ऐसे बन गया बड़ा नक्सली...
फोटो : फैसल इकबाल।
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