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परीक्षा परिणाम से पहले पति की मृत्यु होने पर विधवा श्रेणी में नियुक्ति

9 वर्ष पहले
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जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अनुसूचित जाति की महिला को परीक्षा परिणाम की घोषणा हो जाने के पहले पति की मृत्यु हो जाने पर अनुसूचित जाति की विधवा महिला श्रेणी को मिलने वाले लाभ प्रदान करते हुए प्रधानाध्यापक माध्यमिक के पद पर नियुक्ति देने के आदेश दिए हैं। यह आदेश न्यायाधीश पीके लोहरा ने जिला राजसमंद निवासी राजकुमारी खटीक की ओर से दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए दिए।

अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता इन्द्रराज चौधरी का यह कहना था कि याची एक अनुसूचित जाति की महिला है, उसने लोक सेवा आयोग की ओर से प्रधानाध्यापक पद के लिए जारी विज्ञप्ति के अनुसार अनुसूचित जाति की महिला केटेगरी में आवेदन किया तथा लिखित परीक्षा भी दी। जिसमें वह उत्तीर्ण रहीं।

यह परिणाम 18 नवंबर 2012 को जारी हुआ था, लेकिन इससे पहले ही याची के पति रतनलाल खटीक की मृत्यु 4 नवंबर 2012 को हो गई जिससे वह विधवा हो गई। तथा उसको अनुसूचित जाति के साथ ही विधवा केटेगरी के परिलाभ अवश्य मिलने चाहिए। लेकिन आरपीएससी ने मूल आवेदन फार्म में लिखी गई कैटेगरी को ही सही मानते हुए विधवा के परिलाभ देने से इनकार कर दिया, जबकि हकीकत में महिला विधवा हो चुकी है। अधिवक्ता ने कहा कि अप्रार्थीगण का यह रवैया विधि विरुद्ध एवं मनमाना है।