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डीआरएम को हाईकोर्ट की फटकार, कहा-रवैया बदलें नहीं तो ऐसे अधिकारियों को बर्दाश्त नहीं करेगा यह शहर

8 वर्ष पहले
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जोधपुर। शहर के बदहाल ट्रैफिक व सड़कों के सुधार के संबंध में स्वप्रेरणा से दायर जनहित याचिका की सुनवाई में बुधवार को हाईकोर्ट ने मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) को अदालत में बुलाकर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने चेतावनी भरे अंदाज में डीआरएम को कहा कि यदि वे किसी महकमे के उच्चाधिकारी हैं तो जनसेवक की तरह व्यवहार करें, जनहित के कार्य में बाधा नहीं बने, अन्यथा यह शहर ऐसे अधिकारियों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

मंडल रेल प्रबंधक आरके जैन को खंडपीठ ने जिला कलेक्टर की ओर से मॉनिटरिंग कमेटी की मीटिंग में नहीं जाने व शहर में निर्माणाधीन आरओबी व आरयूबी के निर्माण कार्य में असहयोग करने बाबत न्यायमित्रों अशोक छंगाणी, विपुल सिंघवी तथा पंकज शर्मा की ओर से शिकायत मिलने पर सुनवाई के दौरान ही रेलवे के अधिवक्ता कमल शर्मा के माध्यम से तलब किया था। खंडपीठ ने बाद में डीआरएम को न्यायमित्रों के साथ अतिरिक्त महाअधिवक्ता आनंद पुरोहित के कक्ष में बैठ कर निर्माण कार्य को जारी रखने के लिए समझौता करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव के साथ नॉर्थ वेस्ट रेलवे के जीएम बैठ कर तय करेंगे जमीन का मुआवजा :

रेलवे ने कहा कि खतरनाक पुलिया व पावटा बी रोड पर आरयूबी तथा भदवासिया पर बन रहे आरओबी की जमीन के बदले में मुआवजे के विवाद पर प्रदेश के मुख्य सचिव तथा नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के जीएम बैठ कर समझौता करेंगे। वहीं दूसरी ओर आज से ही इन तीनों स्थानों पर जेडीए अपना कार्य शुरू कर सकेगी। ज्ञात हो कि मुआवजे से उत्पन्न विवाद के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है।

इसलिए की थी डीआरएम की शिकायत:

बुधवार को खंडपीठ में जब सुनवाई शुरू की गई तो न्यायमित्रों की ओर से खंडपीठ को बताया गया कि शहर में नई सड़कों के निर्माण व ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए दो स्थानों पर आरयूबी तथा एक स्थान पर आरओबी का निर्माण चल रहा है, लेकिन रेलवे की ओर से इसमें अड़ंगा डाला जा रहा है। अदालत में जेडीए के अधिशाषी अभियंता राकेश शर्मा ने बताया कि 24 अप्रैल को रेलवे ने चिट्ठी लिख कर तीनों जगह के लिए 9.32 करोड़ रुपए जमा कराने की मांग की थी, जबकि 4 मई 2013 को दूसरा पत्र लिख कर मार्केट वेल्यू के नाम पर 14 करोड़ की मांग की।

इतना ही नहीं उन्होंने आरपीएफ के सिपाही भेज कर साइट पर काम रुकवा दिया तथा इंजीनियरों को धमकी दी। बाद में जिला कलेक्टर के बुलाने पर वे टीएमसी की बैठक में नहीं गए और न ही यूडीएच सचिव की बैठक में आए।