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डाउनलोड करेंजोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल में सफाई सहित विभिन्न व्यवस्थाओं पर असंतोष जताते हुए मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि इतने बड़े अस्पताल को डंपिंग स्टेशन बनने से बचाना पहली प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने अदालत द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति को लगातार दो सप्ताह तक व्यवस्थाओं पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
वरिष्ठ न्यायाधीश दिनेश माहेश्वरी व न्यायाधीश अरुण भंसाली की खंडपीठ ने यह आदेश एमडीएम अस्पताल की दुर्दशा बाबत अधिवक्ता रामरख व्यास की ओर से दायर जनहित याचिका की शुक्रवार को हुई सुनवाई में समिति की ओर से निरीक्षण रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद दिए।
खंडपीठ में वरिष्ठ अधिवक्ता जेएल पुरोहित, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्ण कालिक सचिव तनसिंह चारण तथा अधिवक्ता गरिमा चौहान की समिति ने रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि हालांकि समिति के 7 मई 2013 को किए गए निरीक्षण के बाद सफाई आदि का कुछ कार्य किया गया है, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति संतोषजनक नहीं है। इस पर खंडपीठ ने समिति को लगातार दो सप्ताह तक 18 व 25 मई को अस्पताल का फिर से दौरा करने व 27 मई को पुन: रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
मुख्य द्वार व वार्ड में सफाई :
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि तीन दिन पहले किए गए निरीक्षण के बाद गुरूवार को अस्पताल के मुख्य द्वार पर हालांकि सफाई की गई है, लेकिन स्टाफ व संविदा कर्मियों के वाहन गेट पर खड़े रहने से एंबुलेंस आने जाने में परेशानी रहती है। जनरल वार्ड आदि में धुलाई की गई है, लेकिन मनोविकार वार्ड की स्थिति ठीक नहीं है। यहां पर्याप्त स्टाफ भी नहीं है। अस्पताल के पीछे की टूटी हुई दीवार पुन: बनवा दी गई है, जिससे ट्रैस पासिंग बंद हो गई है, पुलिस चौकी में कल ही दो महिला आरक्षी व एक हैड कांस्टेबल की पोस्टिंग की गई है, लेकिन चौकी में इनके बैठने तक की जगह नहीं है।
ऑक्सीजन प्लॉट के पास कचरा :
रिपोर्ट में कहा गया है कि निरीक्षण के दौरान ऑक्सीजन प्लॉट के पास भारी मात्रा में कचरा पड़ा था व प्रशासनिक खंड के बाहर भी कचरे के ढेर लगे थे। सीटी स्केन, एक्सरे, सोनोग्राफी खंड में सफाई तो है, लेकिन पंखे नहीं चल रहे हैं। अस्पताल में पानी की सप्लाई समुचित नहीं हो रही है जबकि विद्युत आपूर्ति कई बार बाधित रहती है।
सफाई का प्रभारी कौन है?
खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद अतिरिक्त महाअधिवक्ता आरएल जांगिड़ व उनके सहयोगी अधिवक्ता एचएस विश्नोई से पूछा कि अस्पताल में सफाई का प्रभारी कौन है, इस पर उन्होंने कहा कि केयर टेकर का पद है जो खाली है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि यदि कोई नहीं है तो सफाई सहित सभी अव्यवस्थाओं के लिए अस्पताल अधीक्षक को जिम्मेदार माना जाएगा।
सुलभ कॉम्पलेक्स में पानी नहीं आता :
अदालत में जांच के लिए गठित समिति ने रिपोर्ट में लिखा है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों के अटेंडेंट्स आदि के नहाने धोने व शौच आदि के लिए निर्मित सुलभ कॉम्पलेक्स में पानी तक नहीं आता है। हालांकि इसके आसपास तीन दिन पहले पड़ा कचरा हटा दिया गया है, लेकिन वाहन पार्किंग में कचरे की सफाई नहीं की गई। अस्पताल परिसर में निर्माण कार्य जारी रहने से भी जगह-जगह निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है व पार्किंग में भी परेशानी आ रही है।
शहर के दूसरे अस्पतालों में भी अव्यवस्थाएं है :
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वरिष्ठ वकील एमसी भूत ने सहयोगी अधिवक्ता अर्पित भूत के माध्यम से कहा कि इस वक्त अस्पताल में जितनी भी सफाई हुई है वह अदालत द्वारा समिति के भेजने व निरीक्षण करने का परिणाम है, लेकिन शहर के अन्य अस्पतालों में भी अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं। इस पर खंडपीठ ने कहा कि एमडीएम अस्पताल के साथ अन्य अस्पतालों के बारे में भी विचार किया जाएगा।
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