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भंवरी केस : हाईकोर्ट ने सीबीआई की निगरानी याचिका स्वीकार की

8 वर्ष पहले
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जोधपुर। एएनएम भंवरी के अपहरण, हत्या व सबूत मिटाने के मामले में अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण मामलों की विशेष अदालत की ओर से 4 अक्टूबर 2012 को सुनाए गए आदेश के खिलाफ सीबीआई की ओर से दायर निगरानी याचिका को राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अजा-जजा अदालत में गवाहों के बयान लेने पर लगाई गई रोक हटाते हुए इसका निर्णय निचली अदालत पर छोड़ दिया कि हाईकोर्ट में निगरानी याचिकाओं के लंबित रहते गवाही शुरू की जाए अन्यथा नहीं। इससे पहले मामले के दो आरोपियों लूनी विधायक मलखानसिंह के भाई परसराम विश्नोई तथा एक अन्य ओमप्रकाश को अपहरण व हत्या के आरोपों से बरी कर दिया गया था।

गौरतलब है कि याचिका के एडमिशन पर 2 मई को बहस पूर्ण हो गइ थी। न्यायाधीश अतुल कुमार जैन ने सुनवाई पर निर्णय सुरक्षित रखते हुए निचली अदालत में गवाहों के बयानों पर लगाई गई रोक को भी बढ़ा दिया था। तब अदालत में अभियोजन पक्ष सीबीआई की ओर से मुंबई से आए वरिष्ठ लोक अभियोजक ऐजाज खां, विशिष्ठ लोक अभियोजक एसएस यादव, अशोक जोशी व सीबीआई के वकील पन्नेसिंह रातड़ी ने अपना पक्ष रखा।

उन्होंने कहा था कि भंवरी के अपहरण मामले में सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार जब मलखानसिंह विश्नोई, उनकी बहन इन्द्रा सहित फुफेरे भाई सोहनलाल व उनके पुत्र व भतीजे तक शामिल थे तब मलखान के भाई परसराम को आरोपों से बरी कैसे कर दिया गया। साथ ही ओमप्रकाश पर भी गंभीर आरोप थे, उसे भी आरोप मुक्त बता दिया गया। इसके अलावा निचली अदालत की ओर से कई आरोपियों पर गलत आरोप भी निर्धारित कर दिए गए हैं जिसमें सुधार किया जाना आवश्यक है।