जोधपुर। पाली जिले के सेंदड़ा के ग्रामीणों ने पैंथर से खौफजदा होने के बजाय ग्रामीणों ने एकजुटता के साथ कल शाम एक बड़े बाड़े में घेर पूरी रात उसे भागने नहीं दिया। सुबह जल्दी जोधपुर से गई रेस्क्यू टीम उसे बेहोश कर यहां ले आई। रात भर ग्रामीणों ने की चौकीदारी...
पैंथर को बेहोश करने के लिए जोधपुर से गई रेस्क्यू टीम के प्रभारी डा. श्रवणसिंह राठौड़ ने बताया कि पहाड़ों से भटक कर भोजन की तलाश में सेंदड़ा के निकट स्थित लालपुरा गांव तक पहुंचा यह पैंथर तीन-चार दिन से गांव में कुछ जानवरों को मार कर एक व्यक्ति को घायल कर चुका था। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं के स्तर पर पैंथर को काबू करने का प्रयास किया। कल शाम भोजन की तलाश में पैंथर फिर गांव पहुंचा। पालतू पशुओं की तलाश में पैंथर एक बाड़े में घुस गया। बड़े आकार का यह बाड़ा एक तरफ से पूरी तरह से खुला है। इस पर ग्रामीण लाठियां लेकर खुले स्थान को घेरकर बैठ गए। उन्होंने रात भर पहरा देकर पैंथर को वहां से भागने नहीं दिया। देर रात सूचना मिलने पर डा. राठौड़ सुबह जल्दी साढ़े पांच बजे गांव में पहुंच गए। उन्होंने पौने छह बजे पैंथर को बेहोश कर पिंजरे में बंद कर दिया।
अब तक पकड़े ग्यारह पैंथर
जोधपुर जन्तुआलय में वन्यजीवों की देखभाल करने वाले डा. राठौड़ अब तक ग्यारह पैंथर पकड़ चुके है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का यह पहला पैंथर पकड़ा गया है। इस पैंथर को होश आ गया है। इसे एक बार फिर सेंदड़ा की आबादी से दूर पहाड़ी क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह पैंथर करीब बारह-तेरह वर्ष का है। ऐसे में इसको वापस उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। ताकि इस क्षेत्र से अच्छी तरह से वाकिफ होने के कारण पैंथर को भोजन तलाशने में दिक्कत नहीं हो।
सभी फोटो एल देव जांगिड़
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