खुद को रावण का वंशज साबित करने को मची होड़

5 वर्ष पहले
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जोधपुर। अहंकारी रावण का वध असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि सदियों से देश में हर साल रावण दहन किया जाता है। ऐसे में कोई भी अपने आप को रावण से जोड़ना पसंद नहीं करेगा, लेकिन जोधपुर में ब्राह्मण समाज के दो धड़ों में खुद को रावण का वंशज साबित करने की होड़ मची हुई है। अभी तक गोदा गौत्र के श्रीमाली ब्राह्मण की स्वयं को रावण का वंशज बता उसकी पूजा करते आ रहे है, लेकिन अब सारस्वत ब्राह्मण समाज का कहना है कि सही मायने में वे रावण के वंशज है। अपने-अपने दावे...

- ब्राह्मण समाज का कहना है कि इसमें किसी को शक नहीं है कि रावण एक ब्राह्मण था। रावण बहुत ज्ञानी होने के साथ पराक्रमी था।
- जोधपुर के गोदा गौत्र के श्रीमाली ब्राह्मणों ने जोधपुर में बाकायदा रावण का मंदिर बनवा रखा है और नियमित रूप से उसकी पूजा अर्चना करते आ रहे है।
- रावण मंदिर के पुजारी पंडित कमलेश दवे का कहना है कि सही मायने में वे ही रावण के वंशज है। यही कारण है कि वे रावण दहन के पश्चात नियमित रूप से स्नान कर अपनी जनेऊ तक बदलते रहे है।
- दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय ब्राह्मण फैडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष और हिरण शिकार प्रकरण में फिल्म स्टार सलमान खान के वकील हस्तीमल सारस्वत का कहना है कि सही मायने में सारस्वत ब्राह्मण समाज ही रावण का वंशज है।
- उन्होंने कहा कि समाज की तरफ से वर्ष १९९८ में जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंप जोधपुर में रावण दहन पर रोक लगाने की मांग भी की थी।
- उनका कहना है कि यह कोई रावण की सम्पति को लेकर हक का विवाद नहीं है। हमारी पहचान का सवाल है।
- हमारे खानदान में पीढ़ी दर पीढ़ी हम यह सुनते आ रहे है कि हम रावण की औलाद है। इसको लेकर कई बार लोगों के कटाक्ष भी झेले है।
- उनका यह कहना है कि रावण के दौर में ब्राह्मण इतनी गौत्र में विभक्त नहीं थे। उसके बाद के दौर में ब्राह्मण कई गौत्र में विभक्त हो गए। ऐसे में अलग-अलग गौत्र की तरफ से रावण का वंशज होने का दावा किया जा रहा है।
- यदि गहराई से अध्ययन किया जाए तो हो सकता है कि सभी ब्राह्मण एक ही गौत्र से निकले हुए हो। हम उनके दावे को नकार नहीं रहे है, लेकिन हमारा कहना है कि सारस्वत ब्राह्मण की रावण के वंशज है।
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