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शिलान्यास करेंगे। शिलान्यास करेंगे।

5 वर्ष पहले
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पटना. सीतामढ़ी के एक वकील ने भगवान राम के खिलाफ केस की सोमवार को हुई सुनवाई में दलीलें दीं। कोर्ट के सामने वकील ने तर्क दिया कि माता सीता का कोई कसूर नहीं था। इसके बाद भी भगवान राम ने उन्हें जंगल में क्यों भेजा? हालांकि, जज ने पूछा कि इतनी पुरानी घटना के लिए किसे पकड़ेंगे।
कोर्ट में में जज-वकील के बीच क्या हुई बातचीत...
- वकील ने कहा, ''कोई पुरुष अपनी पत्नी को कैसे इतनी बड़ी सजा दे सकता है? भगवान राम ने यह सोचा भी नहीं कि घनघोर जंगल में अकेली महिला कैसे रहेगी?''
- सीजेएम ने केस की फाइल देखी और वकील चंदन सिंह से पूछा कि त्रेता युग की घटना को लेकर केस क्यों किया है?
- त्रेता युग की घटना के मामले में किसे पकड़ा जाएगा, कौन गवाही देगा?
- आपने केस में यह भी नहीं बताया है कि श्रीराम ने सीता जी को किस दिन घर से निकाला था?
- केस में दर्ज विवरण का आधार क्या है?
- जज के सवाल पर वकील चंदन ने कहा, "मैंने माता सीता को न्याय दिलाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मैं अदालत से सीता जी के लिए न्याय की भीख मांगता हूं।"
- "आप और हम, सब लोग भगवान राम, माता सीता और रामायण को मानते हैं।"
- "मैंने अपने केस में रामायण से घटनाओं का विवरण लिया है।"
- कोर्ट ने इस केस को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है।
वकील ने क्यों किया है केस?
- चंदन सिंह के मुताबिक, जब भगवान राम माता सीता के साथ न्याय नहीं कर सके तो इस कलयुग में आम महिलाओं को कैसे न्याय मिलेगा।
- अगर माता सीता को न्याय मिलता है तो ब्रह्मांड की सारी महिलाओं को न्याय मिलेगा।
- सिंह के मुताबिक, माता जानकी सीतामढ़ी की धरती से अवतरित हुई थीं। वह सीतामढ़ी की बेटी हैं। भगवान राम ने उनके साथ इंसाफ नहीं किया।
- चंदन से यह पूछे जाने पर कि फिल्म 'ओ माय गॉड' में भी भगवान के खिलाफ केस को दिखाया गया था, वे कहते हैं, "मैंने कोई फिल्म नहीं देखी। लेकिन बचपन से सीता माता के अपमान से आहत हूं।"
- चंदन ने कोर्ट में शनिवार को केस दाखिल किया था।
आगे की स्लाइड्स में देखें, वकील ने अर्जी में क्या लिखा है...
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