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प्रखंड में मनरेगा से प्रखंड में मनरेगा से

5 वर्ष पहले
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पटना. दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (सीबीएस) की तरफ से शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस शुरू हो गया। फर्स्ट इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन ह्यूमन इम्प्लीकेशन्स ऑफ बायोटेक्नोलॉजी विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कांफ्रेंस में दुनियाभर से करीब 500 वैज्ञानिक जुटे हैं। सुबह 10.30 बजे इसकी शुरुआत हुई। कुलपति प्रो. हरीश चन्द्र सिंह राठौर और एस्टोन यूनिवर्सिटी (यूके) के प्रति कुलपति प्रो. आसिफ अहमद ने इसका उद्घाटन किया।
इस दौरान तकनीकी सेशन में कई तरह के रिसर्च पेपर भी प्रस्तुत हुए। पहले दिन कई अहम विषयों पर लोगों ने अपने विचार रखे। मेडिकल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने गहराई से अपनी बात रखी। बीआईटी ऑडिटोरियम में चल रहे तीन दिवसीय कांफ्रेंस के पहले दिन उद्घाटन के मौके पर कुलपति प्रो.सिंह ने कहा कि हमारा देश अतिथि देवो भव में विश्वास करता है। यहां विविधता में एकता का परिचायक है। योग हमारे देश की पहचान है और यह आज संस्थानों में भी पाठ्यक्रम में शामिल हो रही है।
उन्होंने कहा कि देश विज्ञान के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। ऐसे में इस तरह के कांफ्रेंस बेहद उपयोगी हैं। प्रो.अहमद ने प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली बीमारियों से बचाव के ऊपर अपनी बात रखी। कांफ्रेंस का उद्देश्य देश और दुनिया के बॉयोटेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़े शोधकर्ताओं, शैक्षिक विशेषज्ञों और हेल्थकेयर उद्योग से जुड़े लोगों को एक जगह एकत्रित करना है।
कांफ्रेंस में मुख्यतः ड्रग डिजाइनिंग, कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी, कैंसर, न्यूरो बायोलॉजी, क्रॉप इम्प्रूवमेंट, स्टेम सेल टेक्नोलॉजी एवं नैनो-बॉयोटेक्नोलॉजी आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। इस दौरान विभिन्न विषयों पर पेपर प्रस्तुति के साथ-साथ पोस्टर सेशन, यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड प्रेजेन्टेशन आदि कार्यक्रम भी शामिल होंगे।
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