पटना. पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि आतंकी हेडली के खुलासे के बाद देश से माफी मांगने की बजाय जदयू और कांग्रेस के नेता आतंकियों से हमदर्दी रखने वाले कुतर्क देने की बेशर्मी पर उतर आए हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन के प्रति न केवल नरमी बरती, बल्कि जून 2004 में नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से गुजरात पहुंचे लश्कर के 4 आतंकियों के मारे जाने पर उन्हें बेगुनाह बताने के लिए मुठभेड़ को फर्जी साबित करने की कोशिश की।
इन आतंकियों के साथ मारी गई इशरत जहां को तो वोट बैंक की राजनीति करने वाले बिहार के नेताओं ने महिमामंडित कर बिहार की बेटी बताना शुरू कर दिया था।
मोदी ने कहा कि यूपीए सरकार ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेता अमित शाह को फंसाने के लिए गृह मंत्रालय के जरिये आईबी, सीबीआई तथा एनआईए जैसी उच्चस्तरीय जांच एजेंसियों का खुलकर राजनीतिक दुरुपयोग किया। तत्कालीन यूपीए सरकार ने कोर्ट में हलफनामा देकर पहले इशरत और उसके साथियों को आतंकी माना, लेकिन मारे गए लोगों का मजहब देखकर एक महीने के भीतर हलफनामा बदल दिया गया।
आईबी के निदेशक राजेंद्र कुमार ने उसी समय इशरत के आतंकी फिदायीन होने के सबूत दिये थे, लेकिन राजनीतिक दबाव में उनका इस्तेमाल नहीं किया गया। आतंकी मुठभेड़ को फर्जी साबित करने में सीबीआई का गलत इस्तेमाल हुआ।