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लड़ने को तैयार है। लड़ने को तैयार है।

5 वर्ष पहले
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पटना. उर्दू कवि व शायर निदा फाजली का देहांत 8 फरवरी को हो गया था। सोमवार को निदा फाजली की याद में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान भारतीय भाषा केंद्र (उर्दू) के सहायक प्राध्यापक डॉ. अहमद कफील ने कहा कि निदा फाजली हमारे देश की साझी विरासत के अमीन थे। वह ऐसे कवि व शायर थे, जो उर्दू और हिंदी दोनों में एक समान प्रसिद्ध हुए।
फाजली भले ही इस संसार से चले गए परन्तु “निदा” हमारे बीच रह गई और यह हमेशा हमारे साथ रहेगी। उन्होंने कहा कि निदा ने मंदिर के भजन से अपनी शायरी कि शुरुआत की। वह मीराबाई, कबीर और बिहारी के साथ कुली कुतुबशाह, मीर, गालिब, नजीर और इकबाल से बहुत प्रभावित थे। मानवता ही उनका धर्म था। उन्होंने गीता और कुरान से प्यार का पैगाम दिया। फिल्म और साहित्य दोनों में इनका बड़ा योगदान रहा।
श्रद्धांजलि सभा में डॉ. प्रणव कुमार, डॉ. रविन्द्र कुमार पाठक, डॉ. कर्मानंद आर्य, डॉ.योगेश प्रताप शेखर, डॉ. अनुज लुगुन, डॉ. जितेन्द्र कुमार, डॉ. अम्बरीश गौतम, डॉ. अहसान राशिद, डॉ. ऋचा, डॉ. परिजात आदि शामिल रहे।
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