पटना. सूबे में कानून व्यवस्था की खराब स्थिति को लेकर एनडीए का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला। नेताओं ने राज्यपाल रामनाथ कोविंद से कहा कि अपराधियों पर लगाम लगाने में राज्य सरकार विफल रही है। प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। अपराधियों से राज्य सरकार का नियंत्रण समाप्त हो गया है। बदले राजनीतिक परिदृश्य में राज्य में रहना व अपने जान-माल की रक्षा करना अग्नि परीक्षा के समान हो गया है। जदयू, राजद व कांग्रेस के गठजोड़ से प्रदेश में एक बार फिर भय का वातावरण बना है।
बेलगाम हो गए हैं बेलगाम
एनडीए नेताओं ने कहा कि सरकार सत्ता में बने रहने के लिए विरोधियों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। विरोधी दल के कार्यकर्ताओं की हत्याओं का दौर शुरू हो गया है। सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण अपराधी बेलगाम हो गए हैं। जेल में बंद अपराधी भी अपने गुर्गों के माध्यम से धमकी दे रहे हैं। रंगदारी मांगी जा रही है। पैसा न पहुंचाने वालों की हत्याएं हो रही है। जनता भयभीत है। इस स्थिति को दूर करने के लिए राज्यपाल अपने स्तर से पहल करें। अगर जरूरी हो तो वे सरकार के खिलाफ कठोर निर्णय भी लें, ताकि बिहार की जनता भयमुक्त वातावरण में जी सके।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोजपा नेताओं ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की। इसे भी एनडीए नेताओं ने समर्थन दिया। राज्यपाल ने सभी घटनाओं का विवरण सुनने के बाद उचित कार्रवाई की बात कही। प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय, विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रेम कुमार, सांसद अश्विनी कुमार चौबे, सांसद डा. सीपी ठाकुर, विधायक नंद किशोर यादव, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, लोजपा सांसद चिराग पासवान, प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस, रालोसपा के अरुण कुमार आदि मुख्य रूप से मौजूद थे।