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अपराधी सिर उठाने लगे हैं। अपराधी सिर उठाने लगे हैं।

5 वर्ष पहले
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पटना. पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि नीतीश कुमार अभिव्यक्ति की आजादी के बहाने देशद्रोह करने वालों का समर्थन नहीं कर रहे हैं। नीतीश कुमार को बताना चाहिए कि क्या देश के दस टुकड़े करने की मंशा रखना और पाकिस्तान में हाफिज सईद द्वारा खुशियां मनाया जाना जेएनयू के वामपंथी छात्रों का देशद्रोह नहीं है?
देशद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई से लोकतंत्र खतरे में कैसे पड़ जायेगा? जेएनयू में देश को तोड़ने वाले नारे लगे। जेएनयू छात्रसंघ का अध्यक्ष कन्हैया कुमार नारा लगाने वालों में शामिल रहा। उसकी इस करतूत से केवल बिहार ही नहीं पूरा देश शर्मसार हुआ है।
मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार बतायें कि ‘कितने अफजल तुम मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा, भारत की बर्बादी तक जारी रहेगी जंग और हमको आजादी चाहिए, अफजल हम शर्मिंदा है, तेरे कातिल जिन्दा है’ जैसे राष्ट्रविरोधी नारे लगाने वालों और संसद पर हुए हमले का सूत्रधार रहा अफजल गुरु और आतंकी मकबूल भट्ट की जयंती मनाने वालों के खिलाफ भारत सरकार को कार्रवाई नहीं तो क्या देशद्रोह के लिए उन्हें स्वर्णपत्र से सम्मानित करना चाहिए?
मोदी ने कहा कि वामपंथियों के जिगरी दोस्त बने नीतीश कुमार को भले उनकी देशभक्ति पर कोई सवाल उठता नहीं दिख रहा है, मगर वामपंथियों की देशभक्ति हमेशा संदिग्ध रही है। चीन और सोवियत रूस की दलाली करते रहने वाले वामपंथियों ने तब भी चीन को आक्रमणकारी नहीं माना था जब उसने भारत पर हमला किया था। माओ जिंदाबाद का नारा लगाने वाले जिस वामपंथ का आज नीतीश कुमार समर्थन कर रहे हैं उसके लिए ‘भारत माता की जय और वंदेमातरम’ कहना हमेशा से संकोच की बात रही है।
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